HCs के 106 जज, 2768 न्यायिक अधिकारी COVID पॉजिटिव : CJI

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COVID की दूसरी लहर में Supreme Court के दो न्यायाधीश भी इस वक्त कोरोना संक्रमण से उबरने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि अभी तक विभिन्न उच्च न्यायालयों (HCs) के 106 न्यायाधीश और 2768 न्यायिक अधिकारी COVID पॉजिटिव पाये गये हैं।
शीर्ष अदालत के न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर कोरोना संक्रमण से उबरने का प्रयास कर रहे हैं। मीडियाकर्मियों के लिए मोबाइल ऐप जारी किये जाने के अवसर पर गुरुवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग (Video Conferencing) स्क्रीन पर मौजूद न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति खानविलकर के चेहरे पर कोरोना संक्रमण का असर स्पष्ट झलक रहा था। दोनों न्यायाधीश ज्यादा बोल पाने में असहज महसूस कर रहे थे और बीच-बीच में उन्हें तेज खांसी आ रही थी। इस अवसर पर जब दोनों से बोलने को कहा गया तो दोनों ने ज्यादा बातें नहीं की।
बाद में, CJI Justice N V Ramana ने अपने सम्बोधन में बताया कि सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री का पहला कर्मचारी पिछले वर्ष 27 अप्रैल को कोविड पॉजिटिव पाया गया था, उसके बाद अभी तक 800 कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें छह रजिस्ट्रार और 10 अतिरिक्त रजिस्ट्रार भी शामिल हैं। दुर्भाग्यवश कोविड के कारण तीन अधिकारियों की जानें भी गयी हैं।
न्यायमूर्ति रमन ने कहा, “जहां तक भारतीय न्यायपालिका का संबंध है, तो विभिन्न उच्च न्यायालयों के 106 जज और 2768 न्यायिक अधिकारी कोरोना पाजिटिव पाये गये हैं। इस आंकड़े में दो प्रमुख उच्च न्यायालयों के आंकड़े शामिल नहीं हैं, क्योंकि ये अभी उपलब्ध नहीं हो सके हैं। उच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीश और 34 न्यायिक अधिकारी भी कोरोना संक्रमण के कारण काल-कवलित हुए हैं।”
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “ कोरोना के कारण अपनी जान गंवा चुके इन लोगों के लिए मेरा दिल रो रहा है और उनके परिजनों और चाहने वालों के लिए मेरी संवेदनाएं।”

Supreme Court में होने वाली सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग पर शिद्दत से विचार किया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन ने गुरुवार को कहा कि वह शीर्ष अदालत में होने वाली सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग के प्रस्ताव पर गम्भीरता से विचार कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस दिशा में ठोस पहल करने से पहले वह न्यायालय के सभी न्यायाधीशों की आम सहमति चाहेंगे।
न्यायमूर्ति रमन कोविड महामारी के मद्देनजर मीडियाकर्मियों की सुविधा के लिए मोबाइल ऐप लांच करने के अवसर पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मीडियाकर्मियों को सम्बोधित कर रहे थे।
सीजेआई ने कहा कि नयी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में शुरुआती दिनों में कुछ खामियां आ सकती हैं, लेकिन इसे अनावश्यक रूप से तूल नहीं दिया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति रमन ने देश की न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता को परम्परागत सिद्धांत करार देते हुए कहा कि इन प्रक्रियाओं तक आम लोगों की पहुंच महत्वपूर्ण है, क्योंकि अदालतों, खासकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णयों का देश भर के लोगों की जीवन पर प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान भी अदालती कार्यवाहियां नहीं रुकीं, लेकिन अदालत कक्ष में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होकर सुनवाई के बजाय वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये सुनवाई की ओर बढ़ना आसान नहीं था।
सीजेआई ने कहा कि मोबाइल ऐप विकसित करने के लिए गठित तकनीकी टीम के समक्ष भी अनेक चुनौतियां थीं, क्योंकि टीम के छह सदस्य कोविड पॉजिटिव पाये गये थे, फिर भी इन सदस्यों ने घर से काम करके सात दिनों के भीतर मीडियाकर्मियों के लिए जरूरी सुविधाओं को ऐप में समाहित कर दिया।
इस वीडियो कांफ्रेंसिंग में न्यायमूर्ति रमन के अलावा न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता तथा सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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