Ravidas Mehrotra उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। 2012 में यह समाजवादी पार्टी के टिकट पर लखनऊ मध्य विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए रविदास मेहरोत्रा। 1989 में पहली बार प्रदेश की गृह मंत्री और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता स्वरुप कुमारी बख्शी (बख्शी दीदी) को हराकर जनता दल के टिकट पर उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचे थे। 1975 में जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुए सम्पूर्ण क्रांति के आंदोलन में इन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके कारण इन्हें मीसा और डीआईआर के तहत बीस माह तक जेल में रहना पड़ा। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में रविदास मेहरोत्रा जन-आंदोलनों के चक्कर में 251 बार जेल गए जो जन-आंदोलनों के कारण सर्वाधिक बार जेल जाने का विश्व रिकॉर्ड है। रविदास मेहरोत्रा से लेगेसी इंडिया के लिए अक्षत मित्तल ने लंबी बातचीत की, पेश है उसके मुख्य अंश-
प्रश्न : आप छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे। इमरजेंसी के दौरान मीसा के अंतर्गत जेल जाने से लेकर अबतक लगभग 250 बार जन आंदोलनों के चक्कर में जेल जाने तक का राजनीतिक सफ़र कैसा रहा?
उत्तर : 1975 में मैं जय नारायण महाविद्यालय के छात्रसंघ का उपाध्यक्ष हुआ करता था। उस वक्त पूरे देश में लोकनायक जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में संपूर्ण क्रांति का आंदोलन चल रहा था और इंदिरा गांधी के इस्तीफे की मांग की जा रही थी। 25 जून 1975 को दिल्ली में हुई लोकनायक जय प्रकाश नारायण की महारैली से घबराकर इंदिरा गांधी ने अर्धरात्रि में देश में आपातकाल की घोषणा कर दी। पूरे देश को जेल में तब्दील कर दिया गया और मौलिक अधिकारों को ख़त्म कर दिया गया। मुझे भी उस वक्त मीसा एवं डीआईआर के तहत बीस माह तक जेल में रखा गया। इसके बाद आपातकाल हटा इंदिरा गांधी चुनाव हारीं और मैं लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ का महामंत्री हो गया और तब से लेकर अब तक छात्रों, मजदूरों, गरीबों, किसानों और व्यापारियों के मुद्दों को बुलंद करने की वजह से मैं जेल जाता रहा। आखिरी बार 2 अक्टूबर 2020 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और मुझे 11 दिन के लिए जेल भेजा गया। ये जन आंदोलनों एवं संघर्षों की वजह से मेरी 251वीं जेल यात्रा थी, जो जन आंदोलनों में जेल जाने का विश्व रिकॉर्ड है।
प्रश्न : 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत हुई। आपके हिसाब से समाजवादी पार्टी की इस दुर्दशा के कारण क्या रहे?
उत्तर : 2012 से लेकर 2017 तक प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार रही और जितना विकास का काम इन पांच सालों में उत्तर प्रदेश में हुआ उतना काम न उससे पहले की सरकारों ने किया, न उसके बाद आई भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने। हमारी सरकार ने मेट्रो बनवाई, सड़कें बनवाईं, अस्पताल और एक्सप्रेसवे बनवाए, लेकिन 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने धार्मिक ध्रुवीकरण, झूठे वादे करके, जनता को भरमाकर सरकार बनाने का काम किया, परंतु चुनाव जीतने के बाद ही उनके सारे वादों की पोल खुल गई। बेरोजगारी बढ़ गई, महंगाई बढ़ गई और गढ्ढा मुक्त सड़कों की जगह सड़कें गढ्ढा युक्त हो गईं। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि इस वक्त जनता में व्यापक रोष व्याप्त है और आने वाले चुनावों में यह स्पष्ट हो जाएगा। मैं यह विश्वास दिलाता हूं कि समाजवादी पार्टी 2022 में पूर्ण बहुमत के साथ उत्तर प्रदेश में वापसी करेगी।

प्रश्न : 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस से और 2019 के लोकसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन करने से समाजवादी पार्टी को कितना नुकसान हुआ और आपको निजी तौर पर 2017 के विधानसभा चुनावों में गठबंधन से कितना नुकसान पहुंचा?
उत्तर : 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और 2019 के लोकसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन करने का उद्देश्य भाजपा विरोधी वोटों को एक साथ करना था, लेकिन 2017 में कांग्रेस ने हमारे साथ विश्वासघात का काम किया। कांग्रेस ने इन चुनावों में भाजपा को फायदा पहुंचाया। बात करें 2019 के लोकसभा चुनावों की, तो यहां भी बहुजन समाज पार्टी ने जो किया उसे सबने देखा। बहुजन समाज पार्टी ने गठबंधन का पूरा फायदा उठाया और अपने सांसदों की संख्या बढ़ाई, लेकिन समाजवादी पार्टी के उतने ही सांसद रहे जितने 2014 में थे। आप मौकापरस्ती की हद इससे समझ सकते हैं कि चुनाव में अपने फायदे के तुरंत बाद बसपा ने सपा से गठबंधन तोड़ दिया। इन्हीं सबको देखते हुए हमने इस बार बड़े दलों के स्थान पर छोटे दलों से गठबंधन करने का फैसला किया है।
निजी तौर पर अगर मैं अपनी बात करूं तो आपको पता ही है कि 2017 के विधानसभा चुनावों में 29 जनवरी को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने रोड शो किया और मेरे लिए पूरे लखनऊ मध्य विधानसभा क्षेत्र में वोट मांगे। मैं उस वक्त लखनऊ मध्य क्षेत्र से विधायक था और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री था, लेकिन अगले दिन कांग्रेस ने मारूफ खान को गठबंधन का प्रत्याशी बताकर मैदान में उतार दिया। चुनाव के अंतिम दिन तक यह गतिरोध बना रहा कि महागठबंधन का प्रत्याशी कौन है। मारूफ खान अपने आप को भ्रामक रूप से महागठबंधन का प्रत्याशी बताता रहा, जिससे उसे तकरीबन 13000 मत प्राप्त हो गए। मुझे 2017 में 2012 के मुकाबले तकरीबन 9500 मत ज्यादा प्राप्त हुए, लेकिन मारूफ खान के वोट काटने के कारण मैं 5000 वोटों से चुनाव हार गया। यह कांग्रेस के विश्वासघात का एक उदाहरण था जिससे भाजपा को फायदा पहुंचा।
प्रश्न : हाल ही में हुए जिला पंचायत अध्यक्षी और प्रमुखी के चुनावों में कुछ विचलित कर देने वाली तस्वीरें आईं? आपकी पार्टी पर भी हिंसा के आरोप लगे। यदि हम मान भी लें कि आपकी पार्टी कार्यकर्ताओं ने हिंसा नहीं की और उल्टे आपके कार्यकर्ता ही उस हिंसा के शिकार हुए तो ऐसे में भी समाजवादी पार्टी ने अपने हिंसाग्रस्त कार्यकर्ताओं पर कोई खासा ध्यान नहीं दिया। क्या इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल नहीं गिरेगा?
उत्तर : आपको पता ही है कि किस तरीके से जिला पंचायत सदस्यों के चुनावों में समाजवादी पार्टी की ऐतिहासिक जीत हुई, लेकिन जब जिला पंचायत अध्यक्षी और ब्लाक प्रमुखी के चुनावों की बात आई तो भारतीय जनता पार्टी ने प्रशासन का, गुंडों का और धन का भरसक उपयोग किया। भाजपा के लोगों ने हिंसा की और यहां तक कि महिलाओं की साड़ियां भी खींची गईं। जहां तक समाजवादी पार्टी की बात है तो हम हिंसा क्यों करते, जब हम जिला पंचायत सदस्यों के चुनावों में बहुत आगे थे। अगर निष्पक्ष चुनाव होते तो समाजवादी पार्टी के 70 से अधिक जिला पंचायत अध्यक्ष चुनकर जाते। समाजवादी पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं का पूरा ध्यान रखा, उन्हें किसी के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है। हम लोगों का तो यह नारा है कि पुलिस-प्रशासन के दम पर 2021 तुम्हारा है और जनता के बल पर 2022 हमारा होगा।
प्रश्न : एक चर्चा यह भी है कि समाजवादी पार्टी अब अखिलेश यादव के दौर में जमीनी स्तर से हटती जा रही है, जबकि मुलायम सिंह यादव के समय सपा एक जमीनी पार्टी कही जाती थी। इस तर्क से आप कितना सहमत हैं?
उत्तर : देखिए विपक्ष के लोग अक्सर ऐसी बातें करते हैं जिसका एकमात्र उद्देश्य मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाना होता है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पार्टी कार्यालय पर जनता से मिलते हैं, कार्यकर्ताओं से मिलते हैं और जो भी उनसे मिलना चाहे अखिलेश यादव उन्हें समय जरूर देते हैं। अन्य किसी भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऐसा नहीं करते। कोरोना काल में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के हर कार्यकर्ता ने जमीनी स्तर पर काम किया और आम लोगों को सबसे ज्यादा कोरोना काल में राहत किसी ने पहुंचाई है तो वह है समाजवादी पार्टी। बेशक मुलायम सिंह यादव जमीनी स्तर पर निरंतर काम करते रहे, लेकिन अखिलेश यादव भी जमीनी स्तर पर निरंतर काम कर रहे हैं।
प्रश्न : अक्सर राजनीतिक पार्टियां चुनावों से पहले कुछ वादे करती हैं। इस बार समाजवादी पार्टी ने दिल्ली की तर्ज पर 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली और युवाओं को रोजगार देने के वादे किए हैं। अगर आप सत्ता में आए तो इन वादों को पूरा कैसे करेंगे? क्योंकि दिल्ली और उत्तर प्रदेश की जमीनी हकीकत और वित्तीय स्थिति में जमीन आसमान का फर्क है?
उत्तर : 2012 के चुनावों से पहले जो समाजवादी पार्टी ने वादे किए थे, 2012 में सत्ता में आने के बाद उसे पूरे किए। चाहे वह महिलाओं को पेंशन देने का वादा हो, चाहे वह छात्रों को लैपटॉप देने का वादा हो हमने सब पूरा किया। मैं मानता हूं कि जब उद्योगपतियों का कर्ज माफ़ हो सकता है, उनको करों में रियायतें मिल सकती हैं तो टैक्स देने वाली आम जनता को मुफ्त बिजली, युवाओं को रोजगार और आम महिलाओं को पेंशन क्यों नहीं मिल सकती। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही पहली कैबिनेट बैठक में ये सारे प्रस्ताव मंजूर किए जाएंगे। मैं पूछता हूं कि जब जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा फिजूलखर्ची में इस्तेमाल हो सकता है तो उस आम जनता को मुफ्त बिजली, पेंशन, रोजगार क्यों नहीं मिल सकता? हम जनता से लिया टैक्स का पैसा शत प्रतिशत जनता पर ही खर्च करेंगे और अपने सारे वादे पूरे करेंगे।
प्रश्न : भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश में चार साल से अधिक और केंद्र में इन सात सालों के कार्यकाल को आप कैसा मानते हैं?
उत्तर : जब 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी तो उन्होंने कई वादे किए। लेकिन आज सात सालों बाद भी जमीनी हकीकत वादों से पूरी तरह से अलग है। कहा गया था कि लोगों के खाते में 15 लाख रुपये आएंगे लेकिन बाद में इसे जुमला कहकर एक गंदा मजाक किया गया। बेरोजगारी अपने सर्वोच्च स्तर पर है। ईंधन की कीमतें बढ़ती ही चली जा रही हैं। अर्थव्यवस्था डूबती जा रही है। महंगाई बढ़ती जा रही है। अर्थव्यवस्था में असमानताएं बढ़ती जा रही हैं। प्रति व्यक्ति आय कम होती जा रही है। कोविड के दौरान कुप्रबंधन की हकीकत से सब वाकिफ हैं। अगर हम प्रदेश सरकार की बात करें तो आए दिन हमें बहन-बेटियों के बलात्कार की ख़बरें सुनने को मिलती हैं, हत्या की खबरें सुनने को मिलती हैं, उत्तर प्रदेश हर मामले में पिछड़ता जा रहा है, कोविड के दौरान प्रदेश सरकार ने किस तरह से आंकड़े छुपाये और जन भावनाओं का दमन किया इससे हम सब वाकिफ हैं। विकास के नाम पर प्रदेश सरकार ने भी केवल शिलान्यास हो चुकी योजनाओं का पुनः शिलान्यास किया। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के चुनावों में खोखले विकास की पोल खुल जाएगी।
प्रश्न : ओवैसी की उत्तर प्रदेश में राजनीतिक एंट्री से समाजवादी पार्टी को कितना नुक्सान होगा?
उत्तर : देखिए ओवैसी की पोल खुल गई है। लोग यह जान गए हैं कि ओवैसी भाजपा की बी-टीम के रूप में काम करते हैं। मैंने तो यहां तक सुना है कि ओवैसी के सोशल मीडिया पर डाले जाने वाले पोस्टर भाजपा का आईटी सेल छापता है। ओवैसी का एकमात्र उद्देश्य मुस्लिम वोटों को बांटकर भाजपा को फायदा पहुंचाने का है। ऐसा ही कुप्रयास उन्होंने बिहार में किया, जहां वह कुछ हद तक सफल हुए। लेकिन ऐसा प्रयास जब उन्होंने पश्चिम बंगाल में किया तो वहां वह बुरी तरह फ्लॉप हुए। मैं आपको यह विश्वास दिलाता हूं कि ओवैसी उत्तर प्रदेश में एक भी सीट पर अपनी जमानत नहीं बचा पाएंगे। ओवैसी को जनता को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए और अपने वोटों का ध्रुवीकरण नहीं होने देना चाहिए।
प्रश्न : आगामी 2022 के उत्तर प्रदेश के चुनावों में समाजवादी पार्टी की क्या रणनीति होगी और पार्टी किस मुद्दे को लेकर चुनाव में जनता के बीच जाएगी?
उत्तर : हमारी सरकार आने पर आम आदमी को दवा, अस्पताल और इलाज की मुफ्त सुविधाएं दी जाएंगी और हमारी कोशिश रहेगी कि आम आदमी की जेब में ज्यादा से ज्यादा रुपये बचें और उसकी डिस्पोजेबल इनकम बढ़े, उसका जीवन स्तर सुधरे और प्रति व्यक्ति आय में भी सुधार किया जाए। मैं आपको एक किस्सा बताता हूं। मैं प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री था और मैंने बलरामपुर अस्पताल में डायलिसिस की मशीन लगवाई थी। उस वक्त मशीन मुफ्त में लगी थी और यह फैसला हुआ था कि जब भी कोई मरीज डायलिसिस कराएगा तो उसके 1100 रुपये सरकार देगी, जिससे मशीन की लागत वसूली जाएगी। लेकिन वर्तमान सरकार ने यह व्यवस्था ख़त्म कर दी और यह लागत जनता से वसूली जाने लगी और जनता पर इसका भार डाला गया जो समाजवादी सरकार के समय सरकार उठाती थी। इसके अलावा हम वर्तमान प्रदेश सरकार की दमनकारी और तानाशाही भरी नीतियों से जनता को अवगत कराएंगे। मुझे लगता है कि जनता देख चुकी है समाजवादी पार्टी का खुशहाल दौर और अब आया ये भाजपा का दमनकारी दौर। मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि हमारे किए गए काम ही हमारी पहचान हैं और वही हमारा मुद्दा।
प्रश्न : अंतिम सवाल आपकी विधानसभा क्षेत्र को लेकर। निजी तौर पर आप क्या मुद्दे लेकर लखनऊ मध्य विधानसभा क्षेत्र की जनता के बीच जाएंगे?
उत्तर : आप जानते ही हैं कि लखनऊ मध्य क्षेत्र की विधानसभा सीट कितनी महत्वपूर्ण है। इसी विधानसभा क्षेत्र के अंदर मुख्यमंत्री आवास, मुख्यमंत्री कार्यालय, सचिवालय, राज भवन और विधानसभा जैसी महत्वपूर्ण चीजें आती हैं। जब मैं 2012 में लखनऊ मध्य क्षेत्र से विधायक बना तब से ही मैंने इस क्षेत्र की बेहतरी के लिए काम करना शुरू कर दिया। मेरे कार्यकाल के दौरान इस क्षेत्र की एक भी सड़क ऐसी नहीं थी जो बनी न हो। लेकिन वर्तमान सरकार उन सड़कों का रख-रखाव भी नहीं कर पाई। मेरे कार्यकाल के दौरान मैंने जगह-जगह पीने के पानी के लिए नल लगवाए, पार्क बनवाए, मेट्रो के काम ने गति पकड़ी, नाले बनवाए और जल निकासी की सुविधाएं बेहतर कीं। लेकिन उसके बाद जब सरकार पलटी तब उस सरकार ने बने-बनाई व्यवस्था को चौपट कर दिया। फिर से चुनकर आने पर मैं मेट्रो के अंडरग्राउंड विस्तार पर जोर दूंगा और ट्रैफिक की समस्या को सुलझाने की दिशा में कदम उठाऊंगा। लेकिन सबसे पहले जो वर्तमान सरकार ने विकास कार्यों को बाधित किया है उसे ठीक किया जाएगा। पार्टी के मुख्य मुद्दों पर मैं विस्तार से बात कर ही चुका हूं। इसमें कोई शक नहीं है कि समाजवादी पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ 2022 में उत्तर प्रदेश में सत्ता में आएगी।