नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बार-बार अर्जियां दायर करने की प्रवृत्ति को कानूनी प्रकिया का दुरुपयोग करार देते हुए आदर्श घोटाला मामले के एक आरोपी पर इसके लिए 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने शीर्ष अदालत की चेतावनी की अनदेखी करके अंतरिम याचिका दायर करने वाले आरोपी राज कुमार मोदी को कड़ी फटकार लगायी और याचिका खारिज करते हुए उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका। खंडपीठ में न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट भी शामिल हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि बार-बार अर्जियां दायर करना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
अभियुक्त राजकुमार को मां की बीमारी के नाम पर गत 15 जून को दो माह की अंतरिम जमानत दी गयी थी, लेकिन उसने यह कहते हुए अंतरिम जमानत अगले छह महीने के लिए बढ़ाने की अर्जी दायर की थी कि उसकी मां का निधन हो गया है और उसे कुछ रस्में पूरी करनी हैं। कोर्ट ने छह माह के बजाय एक महीने के लिए अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाने का आदेश देकर अर्जी का निपटारा कर दिया था। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि अब अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाने संबंधी कोई याचिका नहीं सुनी जायेगी। इसके बावजूद उसने अपने अंडकोष की बीमारी के नाम पर एक बार फिर अंतरिम जमानत याचिका दायर कर दी।
सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार अर्जी दायर करने को गम्भीरता से लेते हुए कहा, “बार-बार अर्जियां दायर करना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होता है। इस कोर्ट ने पिछले आदेश में स्पष्ट तौर पर यह कहा था कि अब अंतरिम जमानत के विस्तार को लेकर कोई भी अर्जी सुनी नहीं जायेगी, लेकिन इसके बावजूद अर्जी फिर से दायर की गयी। इसमें दो राय नहीं है कि बार-बार दायर की गयी याचिकाएं/ अर्जियां भारी जुर्माने के साथ खारिज की जायें। इसलिए, हम 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए याचिका खर्जी करते हैं।”