पिछले कुछ दिनों से देश में किसानों का प्रर्दशन जारी है. अब प्रधानमंत्री ने किसान बिल को लेकर उपजे विवाद के बीच विपक्षी पार्टियों पर तंज कसा है और कहा किसान को भ्रमित किया जा रहा है. शुक्रवार को बिहार को कई परियोजनाओं की सौगात देने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि बिल का जिक्र किया और कहा इन अध्यादेशों से किसानों को बहुत फायदा मिलेगा.
पीएम मोदी ने कहा कि एमसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) के जरिए किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाता रहेगा. ये विधेयक किसानों के लिए लाभ ही लाभ लेकर आएगा. जो लोग चुनावों के समय किसानों के लिए बड़ी-बड़ी बाते करते थे, आज जब वही चीजें भारतीय जनता पार्टी कर रही है तो ये लोग भांति-भांति के भ्रम फैला रहे हैं.
विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसान और ग्राहक के बीच जो बिचौलिए होते हैं, जो किसानों की कमाई का बड़ा हिस्सा खुद ले लेते हैं, उनसे बचाने के लिए ये विधेयक लाए जाने बहुत आवश्यक थे. ये विधेयक किसानों के लिए रक्षा कवच बनकर आए हैं. लेकिन कुछ लोग जो दशकों तक सत्ता में रहे हैं, देश पर राज किया है, वो लोग किसानों को इस विषय पर भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं.
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इस विधेयक से मंडी के बाहर का इलाका कवर होता है. APMC एक्ट राज्य का एक्ट है, मंडी भी बरकरार रहेगी. किसानों के पास दो विकल्प रहेंगे. अगर वह मंडी में जाकर उपज बेचना चाहता हैं तो बेच सकता है, लेकिन अगर वह किसी और को उपज बेचना चाहता है तो वह बेच सकता है. किसानों को अपनी उपज बेचने का अधिकार मिलेगा.
‘किसान पंचायत’ कार्यक्रम में देश के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हम स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू कर रहे हैं. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को बढ़ाया जा रहा है, आने वाले समय में भी MSP को बढ़ाया जाएगा. MSP को लेकर किसी को अविश्वास करने की जरूरत नहीं है. एमएसपी कभी भी एक्ट का हिस्सा नहीं रहा है, यह एक प्रशासकीय निर्णय है और इसका इस बिल से कोई तालुक नहीं है.
किसानों का कहना है कि सरकार उन्हें लिखित में दे कि वो MSP नहीं खत्म करेगी. किसानों ने कहा कि हमारी बहुत समय से मांग रही है कि लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए, आज तो अध्यादेश आया है, उसको हम किसानों ने पढ़ा और समझा है और हम चाहते हैं कि अध्यादेश में किसानों के फसलों को खरीदने की गारंटी सरकार अपने हाथ में लें, उसे कंपनियों के हाथ में न दें. हम चौथे अध्यादेश की मांग करते हैं, जिससे लिखित में मिले कि सरकार MSP को नहीं खत्म करने वाली है.