नयी दिल्ली: किसानों से संबंधित मसले पर सरकार के घटक दलों में अंदरूनी मतभेद आज उस वक्त सतह पर आ गया जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सबसे पुरानी सहयेगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल की इकलौती मंत्री हरिसमरत कौर बादल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपना इस्तीफा दे दिया।
केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे को लेकर जारी अटकलबाजियां उस वक्त लगभग समाप्त हो गयी थी, जब अकाली दल के सांसद एवं हरसिमरत के पति सुखवीर सिंह बादल ने कृषि संबंधी विधेयकों पर लोकसभा में चर्चा के दौरान खुलासा कर दिया कि अकाली के कोटे से मोदी मंत्रिमंडल की इकलौती सदस्य हरसिमरत कौर बादल सरकार की किसान विरोधी नीतियों एवं विधेयकों के खिलाफ इस्तीफा देंगी। उसके कुछ समय बाद ही श्रीमती हरसिमरत ने इस्तीफा प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दिया।
I have resigned from Union Cabinet in protest against anti-farmer ordinances and legislation. Proud to stand with farmers as their daughter & sister.
— Harsimrat Kaur Badal (@HarsimratBadal_) September 17, 2020
गौरतलब है कि कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 पर चर्चा में भाग लेते हुए सुखबीर बादल ने कहा, ‘‘शिरोमणि अकाली दल किसानों की पार्टी है और वह कृषि संबंधी इन विधेयकों का विरोध करती है।’’
लोकसभा में इन विधेयकों पर संयुक्त चर्चा के दौरान सुखबीर सिंह बादल ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘शिरोमणि अकाली दल ने कभी भी यू-टर्न नहीं लिया।’’ बादल ने कहा, ‘‘हम राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथी हैं। हमने सरकार को किसानों की भावना बता दी। हमने इस विषय को हर मंच पर उठाया। हमने प्रयास किया कि किसानों की आशंकाएं दूर हों, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।’’