Amarnath Yatra: अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को कठिन चढ़ाई से जूझना पड़ता है, लेकिन जल्द ही उनकी यात्रा अधिक सुगम होने वाली है। जम्मू-कश्मीर सरकार बालटाल से अमरनाथ गुफा तक रोपवे परियोजना शुरू करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घोषणा की कि इस परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह रोपवे लगभग 11.60 किलोमीटर लंबा होगा और इससे यात्रा का समय भी कम हो जाएगा।
सरकार केवल अमरनाथ ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों और पर्यटन केंद्रों को भी रोपवे से जोड़ने की योजना बना रही है। श्रीनगर स्थित ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर तक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 1.05 किलोमीटर लंबा रोपवे बनाया जाएगा। पर्वतमाला योजना के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और जम्मू-कश्मीर सरकार ने 2022 में एक समझौता किया था, जिसके तहत कई रोपवे परियोजनाओं पर काम किया जाएगा।
इसके अलावा, डोडा जिले में भद्रवाह से सियोझदार तक 8.80 किलोमीटर लंबा रोपवे बनाने की योजना है, जिससे पर्यटक स्थलों को बढ़ावा मिलेगा। सोनमर्ग से थाजीवास ग्लेशियर तक 1.60 किलोमीटर का रोपवे भी प्रस्तावित है, जो सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए 25 जनवरी 2025 तक बोलियां आमंत्रित की हैं।
रियासी जिले में दर्शन देवड़ी से शिवखोड़ी मंदिर तक रोपवे लगाने की योजना थी, लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण इसे फिलहाल रद्द कर दिया गया है। हालांकि, अन्य स्थानों पर रोपवे निर्माण की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। दूधपथरी रिसॉर्ट में परिहास से डिस्काल रोपवे, बडगाम में सुथारन से तोसामैदान घास के मैदान तक और रामबन में नाशरी सुरंग से सनासर झील तक रोपवे परियोजनाओं के लिए भी डीपीआर तैयार की जा रही है।
इस पहल से न केवल श्रद्धालुओं की यात्रा आसान होगी, बल्कि जम्मू-कश्मीर के पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। अमरनाथ, शंकराचार्य मंदिर, शिवखोड़ी, सोनमर्ग और अन्य पर्यटन स्थलों को जोड़ने से तीर्थयात्रा और पर्यटन दोनों को नई ऊंचाइयाँ मिलेंगी। सरकार की यह योजना राज्य की आर्थिक और धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित होगी।