वीआरएस लेकर राजनीति में आए बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को विधानसभा चुनाव में जेडीयू (JDU) का टिकट नहीं मिल सका है. बिहार की बक्सर सीट से टिकट के प्रबल दावेदार गुप्तेश्वर पांडेय के चुनाव लड़ने की संभावनाएं उस वक्त खत्म हो गईं, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बक्सर सीट से अपने उम्मीदवार के तौर पर परशुराम चतुर्वेदी के नाम की घोषणा कर दी. इसके बाद बिहार की सियासत में एक बार फिर से सरगर्मी बढ़ गई. दरअसल, कुछ दिन पहले बिहार के पूर्व पुलिस अधिकारी ने नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर जदयू का दामन थामा था.
यह दूसरा मौका है जब पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को राजनीति में उतरने की मंशा पर पानी फिर गया. इसके पहले साल 2009 में भी उन्होंने आइजी पद से स्वैच्छिक सेवानिवृति लेकर राजनीति में किस्मत आजमाने का फैसला किया था. उस वक्त भी वे बक्सर से ही चुनाव लड़ना चाहते थे. तब भी बात नहीं बन पाई थी सियासी अरमानों पर पानी फिरने के बाद गुप्तेश्वर पांडे दोबारा से पुलिस सर्विस में वापसी कर गए थे.
बता दें कि गुप्तेश्वर पांडेय बिहार की बक्सर सीट से चुनाव लड़ने की जुगत में थे, पर एनडीए की सीट शेयरिंग में यह सीट बीजेपी के खाते में चली गई. जेडीयू की लिस्ट में नाम न होने के बाद माना जा रहा था कि बीजेपी उन्हें बक्सर सीट से चुनावी मैदान में उतार सकती है, लेकिन बीजेपी ने भी इस सीट से परशुराम चतुर्वेदी को उतारकर उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है. टिकट न मिलने के बाद गुप्तेश्वर पांडेय ने साफ कर दिया है कि वह इस बार बिहार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहे हैं.
बक्सर सीट बीजेपी के खाते में चले जाना भले ही गुप्तेश्वर पांडेय के लिए राजनीतिक तौर पर झटका माना जा रहा हो, लेकिन अभी भी उनके सामने राजनीतिक विकल्प बंद नहीं हुए हैं. बिहार में राज्यपाल कोटे के 12 विधान परिषद सदस्यों का मनोनयन होना है. चुनाव के बाद जेडीयू की सत्ता में वापसी होती है तो नीतीश कुमार के हाथ में होगा कि वो किसे उच्च सदन भेजते हैं. ऐसे में गुप्तेश्वर पांडेय अब एमएलसी बनाने का दांव भी चल सकते हैं.
बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय सुशांत सिंह केस से काफी चर्चा में आए थे. उनके और शिवसेना के संजय राउत के बीच जुबानी जंग हुई थी. दूसरी तरफ उन्होंने रिया चक्रवती को लेकर भी तीखी टिप्पणी की थी.
गुप्तेश्वर पांडेय ने फेसबुक पर पोस्ट लिखा, ‘अपने अनेक शुभचिंतकों के फ़ोन से परेशान हूं. मैं उनकी चिंता और परेशानी भी समझता हूं. मेरे सेवामुक्त होने के बाद सबको उम्मीद थी कि मैं चुनाव लड़ूंगा, लेकिन मैं इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहा. हताश निराश होने की कोई बात नहीं है. धीरज रखें. मेरा जीवन संघर्ष में ही बीता है. मैं जीवन भर जनता की सेवा में रहूंगा. कृपया धीरज रखें और मुझे फ़ोन न करें. बिहार की जनता को मेरा जीवन समर्पित है. अपनी जन्मभूमि बक्सर की धरती और वहां के सभी जाति मज़हब के सभी बड़े-छोटे भाई-बहनों माताओं और नौजवानों को मेरा पैर छू कर प्रणाम! अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें!’