Bihar : पटना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के लघु सिंचाई मंत्री एवं ‘हम’ पार्टी के अध्यक्ष व नेता संतोष कुमार मांझी को राहत देते हुए उनके विरुद्ध दायर एक मामले को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति संदीप कुमार ने इस मामले पर सभी पक्षों को सुनने के बाद ये आदेश दिया।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि संतोष माझी के विरुद्ध एक अप्रैल 2017 को बोधगया में मामला दर्ज किया गया था।
गया के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संतोष कुमार मांझी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता आईपीसी) की धारा 109, 147, 148, 149, 188, 341, 323, 325, 338, 354बी, 353, 427 और 506 के अंतर्गत दर्ज आरोपों का दो फरवरी, 2021 को संज्ञान लिया। इसके अलावा पुलिस अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत भी आरोप लगाये गये थे।
अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि प्राथमिकी के आधार पर याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई मामला नहीं बन रहा था, क्योंकि याचिकाकर्ता ने सिर्फ जनसभा को सम्बोधित किया था। कुमार के अनुसार, संतोष मांझी के खिलाफ यह मामला कानून का दुरुपयोग था।
सरकारी अधिवक्ता झारखंडी उपाध्याय की ओर से दाखिल हलफ़नामे में अदालत में यह कहा गया संतोष मांझी सिर्फ सार्वजनिक जनसभा को सम्बोधित कर रहे थे।
गौरतलब है कि एक दलित लड़की का अपहरण कर लिया गया था और उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया था। इसी सम्बन्ध में आयोजित जनसभा को संतोष कुमार मांझी सम्बोधित कर रहे थे। चूंकि इस मामले में उस वक्त स्थानीय पुलिस प्रभावी और ठोस कार्रवाई नहीं कर रही थी और यही वजह है कि न तो जांच सही दिशा में थी और न ही दोषी लोगों को पकड़ा जा रहा था। इसी मुद्दे पर संतोष कुमार मांझी एक सार्वजनिक सभा को सम्बोधित कर रहे थे, फलस्वरूप बोधगया थाने में उनके विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
हम पार्टी के अध्यक्ष एवं नेता संतोष मांझी ने इस मामले में पटना उच्च न्यायालय का रुख किया था। न्यायमूर्ति संदीप कुमार ने इस आपराधिक याचिका पर सभी सम्बन्धित पक्षों को सुना और संतोष मांझी के विरुद्ध सीजेएम, गया द्वारा लिये गये संज्ञान को रद्द करते हुए बड़ी राहत दी। #
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