अनवर सईद
पटना: बिहार (Bihar) में इस वर्ष 30 से अधिक प्रजाति के प्रवासी पक्षियों का आगमन हुआ है।
विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर पूरे बिहार में ‘‘एशियन वाटर बर्ड सेंसस (एडब्ल्यूबीएस) 2026’’ किया गया। इसकी सलाह भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारी एस सुधाकर, (सी सी एफ) ने दी।
सुधाकर की सलाह पर अमल करते हुए आईएफएस गौरव ओझा, (वन प्रमंडल पदाधिकारी, पटना) ने गंगा नदी के दीघा घाट से बिदुपुर (वैशाली) तक के 26 किलोमीटर नदी खंड में एडब्ल्यूबीएस कार्यक्रम का सफल संचालन किया।
गणना दल में शामिल डॉ गोपाल शर्मा ने मंगलवार (तीन फरवरी) को बताया कि गंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों— पटना के दीघा घाट से बिदुपुर (वैशाली) तक के 26 किलोमीटर के विस्तृत क्षेत्र में आयोजित सर्वेक्षण में 30 से अधिक प्रजातियों के पक्षी पाये गये। ये निष्कर्ष नदीय पारिस्थितिकी तंत्र की जीवंत समृद्धि को उजागर करते हैं, जहां जलीय पक्षी, जैसे नॉर्दर्न पिंटेल (100+) एवं गडवाल (91), तथा किनारे में रहने वाले पक्षी, जैसे व्हाइट-ब्राउन वैगटेल (175) व बैंक मैना (176) प्रमुखता से दिखे। ये प्रजातियां मछली, कीटों व जलीय जीवों पर निर्भर हैं, जो नदी की खाद्य शृंखला को सुदृढ़ बनाती हैं।
उन्होंने बताया कि ये पक्षी पर्यावरणीय स्वास्थ्य के संवेदनशील संकेतक हैं। ग्रे हेरॉन व लिटिल इग्रेट जैसे मछलीभक्षी भारी धातुओं व प्रदूषण के संचय को प्रतिबिंबित करते हैं। वहीं, बार्न स्वैलो व सुरखाब (रुड्डी शेलडक) जैसी प्रवासी प्रजातियां गंगा के जलस्तर, प्रवाह व जलवायु परिवर्तन प्रभावों को दर्शाती हैं। ओलिव-बैक्ड पिपिट व कॉमन सैंडपाइपर की उच्च संख्या जैव-विविधता संरक्षण की तत्काल आवश्यकता पर बल देती है।
शर्मा ने कहा कि ओस्प्रे व रेड-नेप्ड आईबिस जैसी दुर्लभ प्रजातियां प्रदूषण, अतिक्रमण व मानवीय हस्तक्षेप की चेतावनी देती हैं। राष्ट्रीय डॉल्फिन अनुसंधान केंद्र (एनडीआरसी) इन आंकड़ों के आधार पर गंगा डॉल्फिन आवास संरक्षण नीतियां तैयार करेगा, जो नदी पारिस्थितिकी के समग्र संतुलन के लिए अनिवार्य है।
इस गणना में 11-सदस्यीय दल ने योगदान दिया, जिसमें डॉ. गोपाल शर्मा, कर्नल अमित सिन्हा, आनंद कुमार, प्रदीप कुमार (वनरक्षी), उत्तम कुमार (वनरक्षी), मणिकांत (वनरक्षी), गौरी शंकर, अध्यानन्द (शोरलाइन सपोर्ट), मनीष कुमार (बोटमैन) एवं वाहन चालक राजेश शामिल थे। यह प्रयास बिहार के नदीय संरक्षण को मजबूत बनाता है।
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