बिहार : Prashant Kishor ने बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा को हराकर रचा इतिहास

राष्ट्रीय
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जन सुराज के संस्थापक Prashant Kishor ने सोमवार को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की। इस जीत के साथ उन्होंने भाजपा के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को समाप्त कर प्रतिष्ठित बांकीपुर सीट पर कब्जा कर लिया।

प्रशांत किशोर को 64,151 मत मिले, जबकि भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा को 44,827 मत प्राप्त हुए। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की रेखा गुप्ता को 14,273 मत मिले और उनकी जमानत जब्त हो गई। निर्वाचन आयोग ने मतगणना के 32वें और अंतिम चरण के बाद प्रशांत किशोर को विजयी घोषित किया। मतगणना राजधानी पटना में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुई।

बांकीपुर सीट पर यह परिणाम भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह सीट 1995 से भाजपा के कब्जे में रही है, जब इसे पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। परिसीमन के बाद पटना पश्चिम का नाम बदलकर बांकीपुर कर दिया गया। इस प्रकार प्रशांत किशोर की जीत ने इस शहरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के लगभग तीन दशक लंबे लगातार चुनावी वर्चस्व को समाप्त कर दिया।

बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र बिहार में भाजपा के मजबूत शहरी गढ़ों में शामिल रहा है। इस सीट का संबंध भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राजनीतिक आधार से भी रहा है। नितिन नबीन ने लगातार पांच बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। वह पहली बार वर्ष 2006 में उस समय पटना पश्चिम के नाम से जानी जाने वाली सीट के उपचुनाव में निर्वाचित हुए थे।

वर्ष 2006 के पटना पश्चिम उपचुनाव में नितिन नबीन ने कांग्रेस उम्मीदवार को हराकर पहली बार विधानसभा चुनाव जीता था। वर्ष 2010 में बांकीपुर सीट से उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार विनोद कुमार श्रीवास्तव को 60,840 मतों के अंतर से हराया। वर्ष 2015 में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार कुमार आशीष को 39,767 मतों से पराजित किया। वर्ष 2020 में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार और अभिनेता-राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा के पुत्र लव सिन्हा को 39,036 मतों से हराया था।

बांकीपुर सीट पर नितिन नबीन की लगातार जीत ने इसे भाजपा के सबसे सुरक्षित विधानसभा क्षेत्रों में शामिल कर दिया था। उनके राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद सीट खाली हुई, जिसके कारण उपचुनाव कराया गया। निर्वाचन आयोग ने बांकीपुर समेत तीन विधानसभा सीटों के उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना निर्धारित की थी।

इस उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत जन सुराज के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह पार्टी के चुनावी राजनीति में सक्रिय रूप से उतरने के बाद पहली बड़ी चुनावी सफलता है। प्रशांत किशोर ने पहली बार स्वयं चुनाव मैदान में उतरकर बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ा था। उनके सामने भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा और राजद की रेखा गुप्ता प्रमुख प्रतिद्वंद्वी थे। भाजपा ने पहले घोषित उम्मीदवार के चुनाव मैदान से हटने के बाद नीरज कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया था।

बांकीपुर में भाजपा के लंबे समय से चले आ रहे प्रभुत्व को देखते हुए यह मुकाबला प्रशांत किशोर और जन सुराज के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा था। चुनाव से पहले इस सीट को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता था और पार्टी ने इसे बरकरार रखने के लिए व्यापक संगठनात्मक तैयारी की थी। प्रशांत किशोर की जीत ने इस राजनीतिक समीकरण को बदल दिया है।जन सुराज के लिए यह परिणाम इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी को बिहार की चुनावी राजनीति में अपनी स्वतंत्र पहचान मजबूत करने की चुनौती का सा मना करना पड़ रहा था। बांकीपुर उपचुनाव में जीत के साथ पार्टी ने विधानसभा में अपनी पहली बड़ी चुनावी सफलता दर्ज की है। प्रशांत किशोर की व्यक्तिगत जीत के साथ ही यह परिणाम जन सुराज के राजनीतिक विस्तार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भाजपा के लिए बांकीपुर जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली सीट पर हार राजनीतिक आत्ममंथन का विषय बन सकती है। करीब तीन दशक से पार्टी के कब्जे वाली सीट पर हार और लगातार पांच बार निर्वाचित रहे नितिन नबीन के बाद नए उम्मीदवार की हार ने इस शहरी क्षेत्र में बदलते राजनीतिक समीकरण को सामने रखा है।

बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर और जन सुराज के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इस जीत के साथ प्रशांत किशोर ने अपने चुनावी राजनीतिक सफर की शुरुआत जीत के साथ की है, जबकि जन सुराज ने विधानसभा उपचुनाव में अपनी पहली बड़ी सफलता हासिल की है।

 

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