अक्षत मित्तल
UP (उत्तर प्रदेश) के सीतापुर संसदीय क्षेत्र के सांसद राजेश वर्मा चार बार से लोकसभा के सदस्य हैं। इन्हें हाल ही में पिछड़ा वर्ग के कल्याण संबंधी संसद की स्थायी समिति का चेयरमैन बनाया गया है। राजेश वर्मा 1999 में पहली बार बसपा के टिकट पर लोकसभा पहुंचे थे। वर्ष 2004 में उन्होंने दोबारा फिर बसपा के टिकट पर जीत दर्ज की और उन्हें पार्टी ने लोकसभा में अपना नेता घोषित किया। बाईस साल तक बसपा के संगठन में काम करने के बाद राजेश वर्मा 2014 में भाजपा में शामिल हुए और 2014 और 2019 में भाजपा के टिकट पर लोकसभा पहुंचे। राजेश वर्मा को पार्टी ने एक ओबीसी नेता के रूप में देखा और उन्हें उत्तर प्रदेश में पिछड़ा वर्ग मोर्चा का अध्यक्ष बनाया। इस जिम्मेदारी से वह हाल ही में मुक्त हुए हैं। राजेश वर्मा आजादी के बाद सीतापुर लोकसभा से सर्वाधिक बार चुने जाने वाले सांसद हैं। उनसे लेगेसी इंडिया ने लंबी बातचीत की। पेश है उनसे बातचीत का मुख्य अंश :-
प्रश्न : आपको हाल ही में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के कल्याण से संबंधित संसद की स्थायी समिति का चेयरमैन बनाया गया है, आप इस नयी जिम्मेदारी को किस रूप में देखते हैं?
उत्तर- 2014 में मैं भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुआ और तभी से पार्टी ने मुझे उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग के नेता के रूप में प्रोजेक्ट किया है। पार्टी ने मुझे उत्तर प्रदेश में पार्टी के पिछड़े वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी और अब जो मुझे ये नई जिम्मेदारी दी गई है, इसको भी मैं उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाऊंगा, जैसा कि अब तक निभाते आया हूं। जब भी मुझे कोई भी नयी जिम्मेदारी मिलती है तो मैं उसे कुछ नया सीखने और जन-कल्याण के अवसर के रूप में ही देखता हूं।
प्रश्न: आपने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) से की थी, 2014 में आप भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। बसपा और भाजपा की विचारधारा और ‘वे ऑफ थिंकिंग’ में जमीन आसमान का फर्क है, ऐसे में आपको नई पार्टी में आने के बाद सामंजस्य बिठाने में क्या-क्या दिक्कतें आईं और आप उस पर कैसे पार पा सके?
उत्तर: मैंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बसपा से की थी। सन् 1999 में मैं बसपा से ही पहली बार सांसद बनकर लोकसभा पहुंचा। वर्ष 2004 में भी मैं बसपा के टिकट पर लोकसभा पहुंचा। सबसे जरूरी बात यह है कि मैंने 22 साल तक बसपा के संगठन में बतौर कार्यकर्ता अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2009 में जब मैं लोकसभा का चुनाव हार गया, उसके बाद बसपा में मैं पांच साल तक उपेक्षित पड़ा रहा। बसपा में कार्यकर्ताओं को उपेक्षित किया जाना एक आम बात हो गई है। वर्ष 2014 में मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल और सशक्त नेतृत्व में विकासशील राजनीति को चुना और मैं भाजपा में शामिल हो गया। जिसके बाद मैं 2014 और 2019 में भाजपा के टिकट पर लोकसभा पहुंचा। भाजपा और बसपा में मूलभूत अंतर यही है कि बसपा एक नेता के इर्द-गिर्द ही घूमती है, जबकि भाजपा संगठनात्मक संगठन है जिसमें कार्यकर्ताओं को महत्व दिया जाता है। निजी तौर पर मैंने बसपा में 22 साल तक काम किया और अब पिछले सात सालों से भाजपा में भी संगठन स्तर पर काम कर रहा हूं। दोनों पार्टियां पिछड़े वर्ग के कल्याण का मुद्दा उठाती रही हैं। यह बात और है कि भाजपा सच में पिछड़े वर्ग के कल्याण हेतु प्रतिबद्ध है। इसीलिए नयी पार्टी के साथ सामंजस्य बिठाने में मुझे बहुत ज्यादा दिक्कतें नही आईं।

प्रश्न : ओबीसी के कल्याण के लिए मोदी सरकार ने अब तक आपके हिसाब से कितना काम किया है और भविष्य में आपको क्या लगता है, पार्टी ओबीसी के हित में कौन सी योजनाएं लेकर आएगी?
उत्तर- नरेंद्र मोदी जी जबसे प्रधानमंत्री बने हैं, तभी से उन्होंने प्रतिबद्धता के साथ पिछड़े वर्ग को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। पिछले 60-70 सालों से जो पार्टियां सत्ता में रहीं, उन्होंने सिवाय पिछड़ा वर्ग को छलने, उन्हें भ्रमित करने और ठगने के अलावा कोई और काम नहीं किया। इन पार्टियों ने आजादी के 6-7 दशकों बाद तक पिछड़े वर्ग को अंधेरे में रखा और उनके हित के लिए कभी कोई काम नहीं किया। मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पिछड़ा वर्ग मजबूत हुआ, सशक्त हुआ और उसका आत्मविश्वास बढ़ा। प्रधानमंत्री जी के प्रयासों से ही राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को संसद की मंजूरी मिली। जिस तरह अब तक सात वर्षों में मोदी सरकार समाज के हर वर्ग के लिए प्रतिबद्ध रही, वैसे ही आगे भी रहेगी। पिछड़े वर्ग के हित में जो भी संभव कदम होंगे वे अब तक की ही भांति सरकार आगे भी उठाती रहेगी।
प्रश्न : आप उत्तर प्रदेश की धरती से आते हैं, जो राजनीतिक दृष्टि से अपना व्यापक महत्व रखता है। लेकिन हाल के दिनों में राज्य की राजनीति गरमायी हुई है। उठापटक के संकेत नजर आ रहे हैं। इसे आप कैसे देखते हैं?
उत्तर- जब एक परिवार में पांच लोग रहते हैं, तो उनमें भी कुछ वैचारिक मतभेद कभी-कभार हो जाते हैं। और भारतीय जनता पार्टी तो विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है, तो स्वाभाविक है कि अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए लोगों के बीच कुछ मतभेद हो सकते हैं। लेकिन भाजपा की यह खासियत है कि यह मतभेद कभी मनभेद में नहीं बदलते और बहुत ही कम समय में सब सही हो जाता है। भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है जो लोकतंत्र के दायरे में ही काम करती है। जहां तक बात रही उठापटक की तो ऐसा कुछ भी नहीं है और यह बात आने वाले कुछ दिनों में और साफ़ हो जाएगी। जैसा मैंने पहले ही कहा है कि भाजपा एक संगठनात्मक पार्टी है और केंद्र एवं प्रदेश नेतृत्व इसमें लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव करता रहता है।
प्रश्न : आपकी नजर में प्रदेश की योगी सरकार ने महामारी के दौरान कैसा काम किया है, क्योंकि यह प्रदेश सरकार की आलोचना का मुख्य बिंदु है, भले ही वह भारत में हो या अंतरराष्ट्रीय मीडिया में?
उत्तर- योगी आदित्यनाथ जी की सरकार ने उत्तर प्रदेश में कोविड के दौरान बेहतरीन काम किया है, इसमें कोई शक नहीं। जैसे आबादी के हिसाब से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। वैसे ही उत्तर प्रदेश आबादी के हिसाब से देश का सबसे बड़ा राज्य है। इतनी भीषण और घनी आबादी में योगी जी ने जो काम किया, उसकी तारीफ दुनिया के बड़े-बड़े संगठनों ने की है। इतनी बड़ी आबादी में कोरोना पर इतनी जल्दी काबू पाना, इतनी कम मृत्यु दर, देश में सबसे ज्यादा टीकाकरण करना। यह सब कोविड के दौरान प्रदेश सरकार की उपलब्धियां हैं। ‘सेवा ही’ संगठन के मूल मंत्र के साथ भाजपा के हर कार्यकर्ता, विधायक और सांसद ने अपने-अपने क्षेत्र में लोगों की बहुत सेवा की है, उन्हें इस महामारी के दौरान राहत पहुंचाई है। इससे अच्छा इस विपदा में प्रदेश को और कोई नहीं संभाल सकता था। बात रही आलोचना की, तो आलोचना शक्तिमान की ही होती है और शक्तिमान आलोचना से नहीं डरते। आलोचना उनकी ही होती है जो कुछ करते हैं। बिना कुछ किए न आलोचना होती है, न तारीफ़।
प्रश्न : आपने देखा है कि समाजवादी पार्टी में आंतरिक कलह से पार्टी को 2017 में बहुत नुकसान हुआ था और अब भाजपा में आंतरिक कलह की ख़बरें आ रही हैं, इसका आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी की सफलता पर कितना असर पड़ेगा?
उत्तर- आपने जिस पार्टी की बात की उसमें 2017 का कलह पारिवारिक था, जिसका उद्देश्य धन का बंदरबांट था। हमारे लिए धन नहीं, देश और प्रदेश महत्वपूर्ण है, संगठन महत्वपूर्ण है। वैचारिक मतभेद पर मैं अपने विचार बता चुका हूं। मैं आपको यह आश्वस्त करना चाहता हूं कि भाजपा में कोई आंतरिक कलह नहीं है और कोई मनभेद नहीं है। भाजपा 2022 में उत्तर प्रदेश में और 2024 में देश में एक बार फिर ऐतिहासिक जीत हासिल करेगी, यह मैं आपको विश्वास दिलाता हूं।
प्रश्न : हाल ही में पार्टी ने संगठन में प्रदेश स्तर पर कई बदलाव किए हैं, गुजरात से यूपी लाये गए ए. के. शर्मा को पार्टी ने प्रदेश उपाध्यक्ष बना दिया है, इसके राजनीतिक निहितार्थ क्या हैं?
उत्तर- जैसा कि मैंने आपसे कहा है कि भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। स्वाभाविक है कि इतने बड़े संगठन में बदलाव तो होंगे ही। चूंकि हमारी पार्टी परिवारवाद को आगे नहीं बढ़ाती इसी वजह से हमारी पार्टी में लोकतांत्रिक ढंग से शीर्ष नेतृत्व यह तय करता है कि किसे क्या जिम्मेदारी मिले। केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश नेतृत्व जिसे योग्य समझता है उसे संगठन और सरकार में पद दिया जाता है और हर कार्यकर्ता समर्पण की भावना के साथ काम करता है। हाल ही में हुए बदलाव भी पार्टी को मजबूती देंगे। ए. के. शर्मा जी में बहुत क्षमता है और निश्चित तौर पर पार्टी को उनके प्रदेश उपाध्यक्ष बनने से लाभ होगा।

प्रश्न : महंगाई आज के समय की एक मुख्य समस्या है। जब भाजपा सत्ता में आई थी तो उसके शुरुआती कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद यही थी कि उसने महंगाई को काबू में रखा, भले ही इसका कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरती तेल की कीमतें ही क्यों न हो, लेकिन अब जब महंगाई इतनी बढ़ गई है तो क्या आपको नहीं लगता कि मंदी और बेरोजगारी के बीच इस महंगाई पर लगाम लगाने की जरूरत है?
उत्तर- जैसा कि आपने अपने सवाल में ही कहा कि हमारी सरकार ने महंगाई को अब तक काबू में रखा था और यह तथ्य है। वर्तमान समय की बात करें तो कोविड महामारी के कारण जो वित्तीय भार सरकार पर पड़ा है उसके कारण महंगाई बढ़ी जरूर है, लेकिन हम इससे भी जल्दी ही पार पा लेंगे। लेकिन ये सरकार की संवेदनशीलता ही है कि महंगाई से लड़ने का हमने लोगों को माध्यम दे दिया। सरकार ने 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया, लोगों के खाते में सीधे रुपये डाले गए, जिससे वे महामारी के वक्त भी इससे बेहतर तरीके से लड़ सकें। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि सरकार महंगाई पर भी जल्दी ही काबू पा लेगी।
प्रश्न : पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते दाम क्या जनता के लिए इस दौर में परेशानी की बात नहीं है?
उत्तर- सबसे पहली बात तो यह है कि पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के दाम सरकारी नियंत्रण में नहीं हैं। यह दाम डीकंट्रोल हो चुके हैं। तेल कंपनियों को यह छूट है कि वे अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों के हिसाब से अपना दाम बढ़ा-घटा सकती हैं। दूसरी बात यह कि केंद्र सरकार का राज्यों को सुझाव है कि वे पेट्रोल-डीजल पर कर कम करें। देखिए हम इस पर कह सकते हैं, इसे करना या न करना राज्यों पर निर्भर है। केंद्र सरकार की यह कोशिश है कि पेट्रोल-डीजल को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाए। जैसे-जैसे राज्य इसका समर्थन करेंगे तो मुझे लगता है इसमें भी राहत मिल जाएगी।
प्रश्न : 2014 से पहले बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा था। आज सात साल बाद बेरोजगारी की समस्या हर मायने में भीषण होती जा रही है। क्या आप मानते हैं कि कमजोर विकास संभावनाओं के साथ, बेरोजगारी सरकार के लिए अपने मौजूदा कार्यकाल के शेष समय में सबसे बड़ा सिरदर्द है?
उत्तर – मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि पिछले सात सालों में जितनी प्रगति हुई है, उतनी उससे पहले कभी नहीं हुई। हां, महामारी की वजह से बेरोजगारी थोड़ी बढ़ी जरूर है, लेकिन जैसा कि प्रधानमंत्री जी का संकल्प है आपदा को अफसर में बदलने का, उसके तहत कई योजनाएं धरातल पर पहुंची और गांव-गांव में रोजगारों का सृजन हुआ। मैं आपकी कमजोर विकास संभावनाओं वाली बात से सहमत नहीं हूं। मुझे लगता है हमारे देश के पास इतना सशक्त नेतृत्व है कि वह देश में प्रगति की एक नई गाथा लिख सके। मेरी एक बात से शायद आप भी सहमत होंगे कि आबादी एक बहुत बड़ी समस्या है जो संसाधनों को पूरा पचा जाती है। आबादी को चीन ने भी नियंत्रित किया, जबकि उसकी अर्थव्यवस्था हमसे भी कई गुना बड़ी है। सरकार ने इतनी बड़ी आबादी में कोरोना जैसी महामारी के बावजूद ग्रामीण स्तर पर बहुत बड़ी संख्या में मनरेगा के जरिये रोजगार उपलब्ध कराए। इस आबादी को इसके अलावा खाते में सीधे रुपये, मुफ्त राशन, मुफ्त इलाज, मुफ्त बिजली-पानी सब मिला, जिससे महामारी के दौरान उसका जीवन आसान हो गया। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मुफ्त आवास की सुविधा, घर-घर शौचालय की सुविधा और सोलर लाइट की व्यवस्था। मैं आपको बताना चाहूंगा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा आवास मेरे जनपद सीतापुर को मिले हैं, इसके अलावा पूरे देश में उज्ज्वला योजना के सबसे अधिक कनेक्शन मेरे जनपद में ही मिले। मैं बस इतना कहूंगा कि जब मैं अपने संसदीय क्षेत्र में जाता हूं, तो लोग कहते हैं कि इस महामारी के वक्त हर गरीब के साथी रहे हैं प्रधानमंत्री जी।
प्रश्न : क्या आप मानते हैं कि नोटबंदी से मची तबाही और जीएसटी का आनन-फानन लागू होना एक ऐसी अर्थव्यवस्था में ज़हर की तरह फैल गया, जो पहले से ही बैंकिंग प्रणाली में बड़े पैमाने पर खराब ऋणों से जूझ रही थी?
उत्तर – देखिए 1923 में, बाबासाहेब अंबेडकर ने भारतीय रुपये की समस्याओं पर लिखी अपनी एक पुस्तक में सिफारिश की थी कि रुपये की जमाखोरी और महंगाई को काबू में रखने के लिए भारतीय मुद्रा को हर 10 साल में बदल दिया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से नोटबंदी की गई थी, जो एक बहुत ही साहसिक फैसला था। मैं दावे के साथ यह कह सकता हूं कि नोटबंदी से केवल काले धन वाले और टेरर फंडिंग करने वाले ही परेशान हुए। यदि बात करें जीएसटी की तो यह कांग्रेस लाना चाहती थी, लेकिन कमजोर इच्छा शक्ति के कारण ला न सकी। हमारी सरकार ने अपनी इच्छा शक्ति के कारण जीएसटी लाया और यकीन मानिए आज छोटा व्यापारी जीएसटी से बहुत खुश है। वह उस व्यापक भ्रष्टाचार का सामना अब नहीं कर रहा है। इससे टैक्स संग्रह बढ़ा है और व्यापारियों में खुशहाली आई है। आपको ज्ञात है कि जीएसटी और नोटबंदी के बाद हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। उत्तर प्रदेश के 2017 के नतीजे भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि जनता जीएसटी और नोटबंदी जैसे फैसलों से काफी खुश है।
प्रश्न : अंतिम प्रश्न उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ा हुआ है। आपको क्या लगता है कि तमाम चुनौतियों के बीच पार्टी प्रदेश के आगामी चुनावों में कैसा प्रदर्शन करेगी? किसके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का चुनाव लड़ा जाएगा और पार्टी किस मुद्दे पर चुनाव में उतरेगी?
उत्तर- मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि जो इतिहास उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 325 सीटें जीतकर रचा था वही इतिहास फिर दोहराया जाएगा। योगी जी के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में जिस तरीके से काम हुआ है वैसा कभी नहीं हुआ। जहां तक नेतृत्व की बात है तो वह शीर्ष नेतृत्व तय करेगा कि उत्तर प्रदेश का चुनाव किसके नेतृत्व में लड़ा जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी हमारे सर्वोच्च नेता हैं। मुद्दों पर आएं तो हमारा मुद्दा “सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास” ही है। हर क्षेत्र में हमने इतना काम किया है कि हमें अपने मुद्दे जनता तक ले जाने की जरूरत भी नहीं।