Hanuman Janmotsav विशेष : बजरंगबली से सी‍खें पर्सनेलिटी डेवलपमेंट

Hanuman Janmotsav: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के सर्वोत्तम सेवक, सखा, सचिव और भक्त श्री हनुमान थे। जहां भी श्रीराम की आराधना होती है, हनुमान का स्मरण अपने आप हो आता है। वे सद्गुणों के भंडार थे। उनकी पूजा पूरे भारत और दुनिया के अनेक देशों में इतने अलग-अलग तरीकों से की जाती है कि उन्हें ‘जन देवता’ की संज्ञा दी जा सकती है।

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COVID-19 : दोषारोपण नहीं,  आत्मावलोकन कीजिए

किसी भी सभ्य समाज में दोषारोपण नहीं, आत्मावलोकन किया जाता है। किसी आसन्न समस्या का हल मिल-जुलकर किया जाता है। हमारी परंपरा भी यही रही है और COVID-19 जैसी महामारी से उत्पन्न विडम्बना भरी परिस्थितियों में आज हमारे देश की मांग भी यही है।

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धन्य वह भूमि जहां साक्षात् Shankar के चरण पड़े

मैं समझता हूँ कि ये जो कुछ बात है.. इसके पीछे ही खड़े हैं आदिगुरू शंकराचार्य (Shankaracharya) जी। साक्षात् भगवान् शंकर के अवतार। गीता में धर्म की हानि होने पर ईश्वर के मनुष्य रूप में अवतार का वर्णन है। 

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क्या हो देश का नाम भारत (Bharat), इंडिया या फिर हिंदुस्तान ?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में देश का नाम में इंडिया (India) शब्द को हटाकर भारत (Bharat) करने संबंधी जनहित याचिका (PIL) पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित मंत्रालय के समक्ष अपना प्रतिनिधित्व रखने की सलाह दी है।

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सांसों के लिए ग्रीन गोल्ड (Green Gold) की जरूरत

Green Gold: विकास के नाम पर अभी तक हमने अपनी जो स्थायी पूँजी या समृद्धि थी,उसको सतही या कृत्रिम सुख पाने के लिए बेचने व नष्ट करने का काम किया है। सोने की चिड़िया देश को इसलिए कहा जाता था क्योंकि देश में मिट्टी, पानी, हवा यानी जंगल जीवंत हुआ करते थे।

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Press को ‘पेन प्रस्टीट्यूट’ किसने बनाया..!

भारत में पहले अखबार ‘बंगाल गजट’ का निकलना एक दिलचस्प घटना थी। वह 1780 का साल था ईस्ट इंडिया कंपनी वारेन हेस्टिंग के नेतृत्व में मजबूती के साथ विस्तार पा रही थी, तब कलकत्ता उसका मुख्यालय था। कंपनी के ही एक मुलाजिम जेम्स आगस्टस हिक्की ने हिक्कीज बंगाल गजट आर कलकत्ता एडवरटाइजर नाम का अखबार निकाल कर बड़ा धमाका किया।

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Earth Day : धरती माता को बुखार है

Earth Day : धरतीमाता का ताप साल-दर-साल बढ़ता ही जा रहा है। पिछले साल के मुकाबले इस साल तापमान कुछ और डिग्री ज्यादा रहेगा, मौसम वैज्ञानिकों ने ऐसा अनुमान व्यक्त किया है। अब तो हरीतिमा से ढँके भोपाल का पारा 45 सेल्सियस तक पहुंच जाता है। आज से बीस-पच्चीस साल पहले अमरकंटक और पचमढ़ी में एसी की मशीनें नहीं थीं। इन देसी हिल स्टेशनों में अब बिना एसी गुजारा नहीं। आज वहां जाएं तो झुलस जाएंगे। अमरकंटक की “माई की बगिया” की गुलबकावली वैसे ही झुलसी-झुलसी सी रहती है जैसे गोरे गाल में कोई गरम तवा छुआ दे। 

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