national doctors day

नेशनल डाक्टर्स डे: विद्वानों को क्योंं कहना पड़ा कि- वैद्यराज नमः तुभ्यं यमराज सहोदरः

कुछेक अपवादों को छोड़ दें तो डॉक्टर लोग अपनी पर्ची में न जाने किस कूटलिपि से अंग्रेजी में दवाइयों के नाम लिखते हैं इस रहस्य को सिर्फ वो मेडिकल की दुकानवाला जानता है जिसके यहां से दवाई खरीदने की सिफारिश की जाती है। एक बार मैंने अपनी सहूलियत के हिसाब से मेडिकल स्टोर बदल दिया। दुकानदार ईमानदार निकला। औने-पौने कोई दवा थमाने की बजाय बता दिया कि ये फलाँ डाक्टर की पर्ची है इसमें लिखी दवाएं ढिकां मेडिकल स्टोर में मिलेंगी। वैसे ये दुकानवाला मुझे कोई भी दवा थमा सकता था, पर्ची में यही लिखी हैं बता कर। मैं उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता क्योंकि मैं मेडिकली निरक्षर हूं।

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आम के किस्से तमाम पर अपने ‘सुंदरजा’ का कोई जवाब नहीं!

मेरी छोटी सी बगिया में सुंदरजा के दो पेड़ हैं। इस साल खूब फले। इससे सुंदर आम मैंने अभी तक देखा ही नहीं। बिल्कुल निर्दाग सुनहला। एक विशिष्ट खुशबू और स्वाद इसे आमों की जमात में कुलीन बनाता है। इसमें स्वयं की संरक्षण शक्ति इतनी कि पके आम को दस दिन भी फ्रिज के बाहर रखें तो भी न ये गलेगा न सड़ेगा, खुशबू और स्वाद जस का तस।

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एक सेनापति ऐसा भी जिसने तलवार की जगह कलम चुना! : जयराम शुक्ल

रीवा के सेनापति लाल बल्देव सिंह ने 19वीं सदी में कलम को हथियार बनाकर “भारत भ्राता” नामक पहला राजनीतिक हिंदी समाचार पत्र निकाला। हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिलाने वाले इस नायक ने पत्रकारिता को जन-जागरण का औजार बनाया। स्वतंत्र विचार, सामाजिक सरोकार और निर्भीक संपादन की मिसाल बने लाल बल्देव सिंह, आज भी पत्रकारिता के आदर्श हैं।

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क्या पत्रकारिता वाकई ‘पेन प्रस्टीट्यूट’ बन गई! -जयराम शुक्ल

यह लेख प्रसिद्ध पत्रकार जयराम शुक्ल द्वारा लिखा गया है, जिसमें भारतीय पत्रकारिता के इतिहास की गहराई से पड़ताल की गई है। इसकी शुरुआत 1780 में निकले हिक्की के ‘बंगाल गजट’ से होती है और यह आज के बाजारू मीडिया तक की यात्रा को रेखांकित करता है। लेख में यह बताया गया है कि कैसे भारतीय पत्रकारिता स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जनजागरण और सामाजिक बदलाव का माध्यम बनी, और आज कॉर्पोरेट नियंत्रण में उसकी भूमिका बदलती जा रही है। इसमें अमेरिकी और पश्चिमी मीडिया की भूमिका, प्रेस की स्वतंत्रता, पक्षधरता, और मीडिया के व्यावसायीकरण जैसे विषयों की भी आलोचनात्मक चर्चा की गई है। लेखक ने मीडिया की गिरती साख और उसकी नैतिकता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

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राम से बड़ा राम का नाम

 राम से बड़ा राम का नाम: प्रभु श्री राम का चरित्र और सनातन संस्कृति का गौरव

त्रेता युग में जन्मे प्रभु श्री राम का चरित्र आज भी युगों की सीमाओं को लांघकर विश्व को प्रेरित कर रहा है। रामराज्य की अवधारणा आज भी आदर्श शासन का प्रतीक बनी हुई है। उनके नाम की महिमा और उनके आदर्शों की प्रासंगिकता पर यह आलेख प्रकाश डालता है।

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डॉ. राम मनोहर लोहिया: जिन्होंने गांधी को पढ़ा, भगत सिंह को जिया

राजनीति के तिलस्मी संसार में राममनोहर लोहिया का योगदान अप्रतिम था। उनके विचारों ने युवाओं, साहित्यकारों और समाजवादियों को गहराई से प्रभावित किया। उनके नेतृत्व में गैर-कांग्रेसी राजनीति की नींव पड़ी, और आज भी उनके विचार प्रासंगिक बने हुए हैं। 23 मार्च को, जहां भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत को याद किया जाता है, वहीं डॉ. लोहिया की जयंती भी मनाई जाती है।

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Nirala’s birth anniversary : सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुंज थे महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

Nirala’s birth anniversary : भारतेन्दु ने देश की विवशता को देखते हुए इकट्ठा होकर रोने और ‘भारत दुर्दशा’ का आख्यान लिखकर जिस राष्ट्रीय चेतना की अलख जगाई, उसका परिष्कार ‘भारत-भारती’ ‘एक फूल की चाह’ ‘विप्लव गायन’ से लेकर ‘जागो फिर एक बार’ और ‘शिवाजी का पत्र’ के माध्यम से आम हिन्दी जन तक हुआ। भारतेन्दु की अलख को अनेक कवियों ने स्वर दिया है मैथिलीशरण गुप्त, माखनलाल चतुर्वेदी, बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ आदि अनेक कवियों के बीच छायावादी कविता में सबसे ऊँचा सुर और स्वर महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला का था।

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Budget 2025: सर्वसमावेशी और दूरदर्शी बजट; मध्यम वर्ग, किसानों के लिए बहुत कुछ

General Budget 2025 एक सर्वसमावेशी और दूरदर्शी बजट है। यह कई मायने में सर्वव्यापी और सर्वस्पर्शी भी है। खासकर ताजा बजट प्रस्तावों के माध्यम से मध्यम वर्ग को जो भारी कर राहत प्रदान किया गया है और आयकर छूट सीमा को बढ़ाकर 12 लाख रुपये तक कर दिया गया है, उससे अर्थव्यवस्था को विभिन्न कोणों से मजबूती मिलने के आसार प्रबल हैं। कुल मिलाकर यह आम आदमी का बजट है, जो गरीबों, युवाओं, अन्नदाता किसानों और नारी शक्ति को आर्थिक मजबूती प्रदान करता है।

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#Mahashivratri पर 37 वर्षों बाद प्रदोष, शिव एवं सर्वार्थ सिद्धियोग का बन रहा संयोग, इस तरह करें महादेव की अराधना

नयी दिल्ली: भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का #Mahashivratri महाशिवरात्रि पर्व सबसे बड़ा पर्व है। मान्यता है कि इस तिथि पर ही भगवान शंकर और माता पार्वती का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि पर कई दुर्लभ महासंयोग बन रहे हैं,

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‘चाँद’ का कृष्ण पक्ष- पढ़िए साहित्यकार संजय मिश्रा की कलम से

अपने देश का चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण से पूरे देश में खुशी का माहौल है। चंद्रयान जिस तरह अपने निश्चित कार्यक्रम के अनुरूप चाँद की ओर अग्रसर है, आशा है कि चंद्रयान-3 इस बार सफलतापूर्वक चाँद पर उतर जाएगा।  इसकी सहायता से हमारे वैज्ञानिकों द्वारा चंद्रमा के उस अँधेरे पहलू को रोशन करने की कोशिश […]

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