नेशनल डाक्टर्स डे: विद्वानों को क्योंं कहना पड़ा कि- वैद्यराज नमः तुभ्यं यमराज सहोदरः
कुछेक अपवादों को छोड़ दें तो डॉक्टर लोग अपनी पर्ची में न जाने किस कूटलिपि से अंग्रेजी में दवाइयों के नाम लिखते हैं इस रहस्य को सिर्फ वो मेडिकल की दुकानवाला जानता है जिसके यहां से दवाई खरीदने की सिफारिश की जाती है। एक बार मैंने अपनी सहूलियत के हिसाब से मेडिकल स्टोर बदल दिया। दुकानदार ईमानदार निकला। औने-पौने कोई दवा थमाने की बजाय बता दिया कि ये फलाँ डाक्टर की पर्ची है इसमें लिखी दवाएं ढिकां मेडिकल स्टोर में मिलेंगी। वैसे ये दुकानवाला मुझे कोई भी दवा थमा सकता था, पर्ची में यही लिखी हैं बता कर। मैं उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता क्योंकि मैं मेडिकली निरक्षर हूं।
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