सीएम Hemant Soren ने राष्ट्रपति से MMDR विधेयक पर पुनर्विचार का आग्रह किया, झारखंड के वित्त पर असर का मुद्दा उठाया

राष्ट्रीय
Spread the love

झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से संसद के दोनों सदनों से पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के संवैधानिक, संघीय, वित्तीय और सामाजिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।

राष्ट्रपति को लिखे पत्र में सीएम सोरेन ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन के तहत राज्यों को खनिज अधिकारों या खनिजयुक्त भूमि पर कर, उपकर या अन्य शुल्क लगाने से केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के अलावा रोक दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और केंद्र-राज्य के संवैधानिक संतुलन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मुख्यमंत्री ने जुलाई 2024 में खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकरण बनाम स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने राज्यों को खनिजयुक्त भूमि पर कर या उपकर लगाने का अधिकार मान्यता दी थी।

उन्होंने कहा कि इसके बाद झारखंड विधानसभा ने उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित संवैधानिक स्थिति के अनुरूप झारखंड खनिजयुक्त भूमि उपकर अधिनियम, 2024 पारित किया था।

सीएम सोरेन ने कहा कि खनन गतिविधियों के कारण झारखंड को महत्वपूर्ण सामाजिक और पर्यावरणीय लागत उठानी पड़ी है। विशेष रूप से आदिवासी और खनन प्रभावित समुदायों को विस्थापन, भूमि की हानि, पर्यावरणीय क्षति, प्रदूषण और पारंपरिक आजीविका में व्यवधान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2024-25 में झारखंड के अपने गैर-कर राजस्व में करीब 84.9 प्रतिशत हिस्सा खनन क्षेत्र से आया, जो राज्य के वित्त के लिए खनिज राजस्व के महत्व को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि झारखंड खनिजयुक्त भूमि उपकर से वर्ष 2024-25 में 1,379 करोड़ रुपये और वर्ष 2025-26 में 7,488 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वर्ष 2026-27 के लिए इससे 13,215 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।

सीएम सोरेन ने कहा कि इस राजस्व का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण विकास, पेयजल और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कल्याणकारी एवं विकास योजनाओं के लिए किया जाता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य की उपकर लगाने की शक्ति सीमित किए जाने से झारखंड को हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये के संभावित राजस्व से वंचित होना पड़ सकता है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति से उपलब्ध सभी संवैधानिक विकल्पों पर विचार करने तथा खनिज उत्पादक राज्यों, आदिवासी समुदायों और खनन प्रभावित क्षेत्रों की चिंताओं को उचित महत्व देने का आग्रह किया।

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *