कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी Kanhaiya Kumar ने रविवार को कहा कि बिहार में हालिया छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती, लाठीचार्ज और मानवाधिकार उल्लंघन की जांच के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) द्वारा गठित फैक्ट-फाइंडिंग समिति ने अपना काम शुरू कर दिया है और समिति की रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी।
Kanhaiya Kumar ने यहां संवाददाताओं से कहा कि समिति ने पटना और बिहार के अन्य जिलों में छात्रों, उनके अभिभावकों, शिक्षकों, वकीलों, पत्रकारों तथा अन्य संबंधित पक्षों से बातचीत कर साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरी कवायद का उद्देश्य राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय घटनाओं से जुड़े तथ्यों को सामने लाना है।
उन्होंने बताया कि समिति यह भी जांच कर रही है कि 22 और 25 जुलाई को हुए प्रदर्शनों के दौरान कितने छात्रों को हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया, उनके खिलाफ कौन-कौन सी धाराएं लगाई गईं और क्या उनके मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया।
Kanhaiya Kumar ने आरोप लगाया कि प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर अत्यधिक पुलिस कार्रवाई की गई। उन्होंने दावा किया कि कई छात्रों ने समिति के समक्ष अवैध हिरासत, मानसिक उत्पीड़न और कानूनी अधिकारों के उल्लंघन की शिकायतें की हैं। उन्होंने कहा कि नाबालिगों और छात्राओं के साथ किए गए व्यवहार को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य बल प्रयोग के आदेश किस स्तर से जारी किए गए थे। कन्हैया कुमार ने कहा कि यदि सरकार ने छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का निर्णय किया है तो केवल इसकी घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे घटनाक्रम की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
एनएसयूआई नेता ने कहा कि देशभर के युवा यह सवाल उठा रहे हैं कि प्रश्नपत्र बार-बार लीक क्यों हो रहे हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता क्यों कम हो रही है और छात्रों का भविष्य लगातार क्यों प्रभावित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन सवालों का जवाब देने के बजाय छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि फैक्ट-फाइंडिंग समिति दस्तावेजों, प्राथमिकी (एफआईआर), प्रभावित छात्रों के बयानों और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट एआईसीसी को सौंपी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर इसे उच्च न्यायालय तथा अन्य उपयुक्त मंचों के समक्ष कानूनी उपाय अपनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।