CPI(M) नेता Minakshi Mukherjee पर सीतलकुची पुलिस स्टेशन के बाहर अंडे से किया गया हमला

CPI(M) नेता Minakshi Mukherjee पर सीतलकुची पुलिस स्टेशन के बाहर अंडे से किया गया हमला

राष्ट्रीय
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पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में मंगलवार (7 जुलाई) को CPI(M) नेता Minakshi Mukherjee पर कथित तौर पर अंडे फेंके गए। यह घटना सीतलकुची पुलिस थाना के बाहर उस समय हुई, जब वह पार्टी कार्यकर्ता Montu Miya के परिवार से मुलाकात कर लौट रही थीं। CPI(M) के अनुसार, Montu Miya का शव कुछ दिन पहले मिला था और उनके परिवार ने हत्या की आशंका जताई है।

घटना के समय Mukherjee  के साथ CPI(M) के कूचबिहार जिला सचिव Ananta Roy और स्थानीय नेता  Alokesh Das भी मौजूद थे। कथित हमले के बाद Mukherjee ने अपनी गाड़ी के भीतर से एक वीडियो जारी कर आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या अब लोगों का सार्वजनिक सड़कों पर चलना भी सुरक्षित नहीं रह गया है। साथ ही, उन्होंने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। CPI(M) ने दावा किया कि यह घटना सीतलकूची पुलिस थाने के ठीक सामने हुई और इसके लिए BJP कार्यकर्ताओं व समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, खबर लिखे जाने तक BJP की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी। यह घटना पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद विपक्षी नेताओं पर कथित हमलों और अंडे फेंके जाने की घटनाओं को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच सामने आई है। इससे पहले सोनारपुर में तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी पर भी कथित तौर पर अंडा फेंका गया था, जिसके बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों से विपक्षी नेताओं के खिलाफ इसी तरह के विरोध प्रदर्शन और हमलों की खबरें सामने आई थीं।

यह मामला जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से कलकत्ता हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। याचिकाकर्ता वकील दानिश फ़ारूक ने आरोप लगाया कि चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी नेताओं पर लगातार हमले किए गए और राजनीतिक दलों के कार्यालयों में तोड़फोड़ हुई। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक माहौल के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। याचिका में अंडे फेंकने की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की गई है। Minakshi Mukherjee इससे पहले भी ऐसे मामलों में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा चुकी हैं। उनका आरोप है कि सार्वजनिक स्थानों पर अंडे फेंकने जैसी घटनाओं के बावजूद पुलिस निष्क्रिय बनी रही, जबकि राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान CPI(M) कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज की गईं।

 

 

 

 

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