नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि याचिका में निपटारे में विलम्ब उसके कोर्ट से दूसरे कोर्ट में ट्रांसफर का आधार नहीं हो सकता।
जस्टिस वी रमासुब्रमण्यम की एकल पीठ ने मोती लाल (मृत) की ट्रांसफर पिटीशन खारिज करते हुए कहा कि नागरिक प्रकिया संहिता (सीपीसी) की धारा 25 सुप्रीम कोर्ट को यह शक्ति प्रदान करती है कि वह किसी वाद, अपील या अन्य न्यायिक कार्यवाही को किसी एक राज्य के हाईकोर्ट या अन्य सिविल कोर्ट से दूसरे राज्य के हाईकोर्ट या अन्य सिविल कोर्ट में स्थानांतरित करने का निर्देश दे सकता है, बशर्ते वह इस बात को लेकर संतुष्ट हो कि ऐसा किया जाना न्याय के हक में बेहद जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक कोर्ट के अपने अधिकार क्षेत्र होते हैँ और महज याचिका के निपटारे में विलम्ब के एक मात्र आधार पर उस याचिका को एक कोर्ट से दूसरे कोर्ट में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
इस मामले में याचिकाकर्ता ने तेलंगाना हाईकोर्ट में 2016 में दायर एक रिट अपील को दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की इजाजत मांगी थी। अपीलकर्ता की दलील थी कि हैदराबाद हाईकोर्ट में उसकी याचिका अंतिम निपटारे के लिए सूचीबद्ध नहीं की जा सकी है, इसलिए उसे दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। यह रिट अपील तत्कालीन आंध्र प्रदेश सरकार (अब तेलंगाना) द्वारा शुरू की गयी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से संबंधित है।
अपीलकर्ता का निधन हो चुका है और उसकी ओर से उसके कानूनी प्रतिनिधि मुकदमा लड़ रहे थे।