Delhi High Court ने शुक्रवार को चेक बाउंस के सात मामलों में अभिनेता राजपाल यादव की सजा को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि यादव विवाद के समाधान को लेकर बार-बार दिए गए अपने आश्वासनों को पूरा करने में विफल रहे। हालांकि, कोर्ट ने सजा में आंशिक संशोधन करते हुए प्रत्येक मामले में छह महीने की बजाय तीन महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई। सभी सजाएं एक साथ (Concurrent) चलेंगी।
जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की एकल पीठ ने सेशन कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए सजा की अवधि में संशोधन किया। अदालत ने राजपाल यादव को सातों मामलों में शिकायतकर्ता को प्रत्येक मामले में 1.05 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, उन्हें शिकायतकर्ता को 1.04 लाख रुपये और 75,000 रुपये तथा राज्य को 25,000 रुपये देने का भी आदेश दिया गया।
हाई कोर्ट ने राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव को भी प्रत्येक मामले में शिकायतकर्ता को 5,51,380 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि राजपाल यादव द्वारा पहले ही जमा किए जा चुके 2.25 करोड़ रुपये कुल देय राशि में समायोजित किए जाएंगे।
यह मामला M/s मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत दायर चेक बाउंस मामलों से संबंधित है।
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, राजपाल यादव ने वर्ष 2010 में अपनी निर्देशकीय पहली फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए दिल्ली स्थित मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। वर्ष 2012 में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिसके बाद वह ऋण नहीं चुका सके और मामला कानूनी विवाद में बदल गया।
वर्ष 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए छह महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी। यह फैसला बाद में सेशन कोर्ट ने भी बरकरार रखा, जिसके बाद यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की। वर्ष 2024 तक बकाया राशि बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये हो गई थी।
मई 2024 में सेशन कोर्ट ने फिर से दोषसिद्धि और छह महीने की सजा को बरकरार रखा। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने यादव के वकील द्वारा समझौते का भरोसा दिए जाने पर सजा पर अंतरिम रोक लगा दी और मामले को दिल्ली हाई कोर्ट मीडिएशन सेंटर भेज दिया।
हालांकि, अदालत ने पाया कि बार-बार आश्वासन और कई बार सुनवाई टलने के बावजूद राजपाल यादव ने तय समय पर भुगतान नहीं किया। इसमें किश्तों में 2.5 करोड़ रुपये जमा करने का वादा भी शामिल था, जिसे वह पूरा नहीं कर सके।
फरवरी 2026 में हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करने पर अदालत ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया। अतिरिक्त समय देने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्होंने 5 फरवरी को सरेंडर किया। बाद में शिकायतकर्ता के पास 1.5 करोड़ रुपये जमा करने के बाद उन्हें सजा पर अंतरिम राहत (सस्पेंशन ऑफ सेंटेंस) मिल गई। वर्क फ्रंट की बात करें तो राजपाल यादव हाल ही में फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ और ‘भूत बंगला’ में नजर आए थे।