राजधानी के मौसम में सर्दी का असर बढ़ने के साथ ही लोगों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ प्रदूषण बढ़ने से आबोहवा दिन प्रतिदिन खराब हो रही है तो पिछले कई दिनों से कोरोना वायरस (कोविड-19) संक्रमण का प्रकोप भी लगातार बढ़ता ही जा रहा है। वहीं, गैस चैंबर बन रही दिल्ली की हवा अब ‘खराब’ के बजाय ‘खतरनाक’ हो गई है।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के अनुसार शुक्रवार को यहां वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है। डीपीसीसी ने राजधानी की आबोहवा का जो सूचकांक जारी किया है वह बहुत ही चिंताजनक है। आरके पुरम में शुक्रवार को सुबह 11 बजे PM2.5 और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 559 दर्ज किया गया, जो ‘खतरनाक’ स्थिति को दर्शाता है। आकाश में धुंध छाई हुई है। यह मौसम सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है।
डीपीसीसी के अनुसार दिल्ली की हवा आज ‘खतरनाक’ की श्रेणी में पहुंच गई है। सुबह सात बजे राजधानी का अलीपुर इलाका 442 वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के साथ सबसे प्रदूषित क्षेत्र था। रोहिणी में 391 और द्वारका में 390, आनंद विहार में 387 जबकि आरके पुरम में एक्यूआई 333 दर्ज किया गया था।
राजधानी के आसपास की बात करें तो आज सुबह गाजियाबाद में यह 380, ग्रेटर नोएडा में 377 और नोएडा में 380 रिकॉर्ड किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक आईटीओ पर पीएम 2.5 का स्तर 356 है। यह ‘बहुत खराब श्रेणी’ है।
दिल्ली में जहां एक ओर प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है वहीं दूसरी ओर कोरोना भी बढ़ रहा है। गुरुवार शाम के आंकड़ों के मुताबिक कोरोना संक्रमण के 3882 नए मामले दर्ज किए गए और 35 मरीजों की मौत हुई है। इस वैश्विक महामारी से राजधानी में कुल संक्रमित 344318 और मरने वालों की संख्या 6163 है। सक्रिय मामले 25 हजार 237 हैं।