15 अगस्त तक Bihar के सभी सरकारी स्कूलों में शुरू होगी डिजिटल शिक्षा, बंद पड़े कंप्यूटर भी होंगे चालू

राष्ट्रीय
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Bihar सरकार ने राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में 15 अगस्त तक डिजिटल शिक्षा शुरू करने की घोषणा की है। इस अभियान के तहत वर्षों से स्कूलों में बंद पड़े कंप्यूटरों को भी दोबारा चालू कर विद्यार्थियों की पढ़ाई में उपयोग किया जाएगा। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मंगलवार को विधानसभा में यह जानकारी देते हुए कहा कि सरकार डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर काम कर रही है।

विधानसभा में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक राजू तिवारी के प्रश्न का उत्तर देते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2012-13 में बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (बीएसईआईडीसी) के माध्यम से सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए थे। हालांकि, योजना के क्रियान्वयन में कई खामियों के कारण यह महत्वाकांक्षी परियोजना अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकी और अधिकांश विद्यालयों में कंप्यूटर लंबे समय से अनुपयोगी पड़े हैं।

मंत्री ने कहा कि विभाग ने इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और परियोजना के क्रियान्वयन में हुई लापरवाही की जांच कराई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जिन अधिकारियों या संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय होगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मिथिलेश तिवारी ने बताया कि राज्य सरकार अब डिजिटल शिक्षा के विस्तार को प्राथमिकता दे रही है। इसी दिशा में अब तक 150 मॉडल स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था शुरू की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी विद्यालयों में 15 अगस्त तक डिजिटल शिक्षा लागू करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि छात्रों को आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।

उन्होंने यह भी बताया कि इस सप्ताह वह नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेंगे। इस बैठक में शिक्षा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग, डिजिटल संसाधनों के विस्तार और शिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

राज्य सरकार का मानना है कि डिजिटल शिक्षा के विस्तार से सरकारी स्कूलों के छात्रों को नई तकनीकों से जोड़ने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और भविष्य की प्रतिस्पर्धी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही लंबे समय से निष्क्रिय पड़े संसाधनों का उपयोग सुनिश्चित कर शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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