Lok Sabha में सोमवार को विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन और केरल का संवैधानिक नाम बदलकर ‘केरलम’ करने समेत चार महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए।
विपक्षी सांसदों के विरोध के बीच ध्वनिमत से न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026, खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026, केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए गए।
न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 में देश में न्यायाधिकरणों की व्यवस्था में व्यापक संस्थागत बदलाव का प्रस्ताव है। इसके तहत चार सदस्यीय राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग (NTC) के गठन का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित आयोग का उद्देश्य न्यायाधिकरणों की स्वतंत्रता, दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना तथा उनके प्रशासन और कामकाज में एकरूपता लाना है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत NTC न्यायाधिकरणों के सदस्यों की नियुक्ति, उनके प्रदर्शन की समीक्षा और उनके खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए जिम्मेदार होगा। आयोग का अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को बनाया जाएगा। उनका कार्यकाल पांच वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, रहेगा।
विधेयक में न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों के लिए पांच वर्ष का कार्यकाल और अधिकतम 70 वर्ष की आयु सीमा का प्रस्ताव है, जबकि सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष या 67 वर्ष की आयु तक होगा। इसमें सदस्यों को हटाने की प्रक्रिया को स्पष्ट करने तथा डेटा ग्रिड के माध्यम से उनके प्रदर्शन की निगरानी के लिए व्यवस्था स्थापित करने का भी प्रस्ताव है।
प्रस्तावित कानून न्यायाधिकरणों की नियुक्ति, कार्यकाल, सेवा शर्तों और संस्थागत स्वतंत्रता से जुड़े उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इससे अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्थाओं से उत्पन्न समस्याओं का समाधान होगा और न्यायाधिकरणों की निगरानी के लिए एक समान संस्थागत व्यवस्था स्थापित की जा सकेगी।
खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 में खनिज अधिकारों, कराधान और खनिजों की खोज से संबंधित मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव है। इसमें कुछ मामलों में केंद्र सरकार की निगरानी बढ़ाने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक में खनिज वाले क्षेत्रों पर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले कुछ उपकर, कर या शुल्क से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं। प्रस्ताव के तहत कुछ निर्धारित शुल्क लगाने से पहले राज्यों को केंद्र की मंजूरी लेने की आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा पूर्व में लगाए गए शुल्कों से संबंधित प्रावधानों और कुछ ऐसी वसूली न हो सकी राशि को अमान्य किए जाने की व्यवस्था का भी प्रस्ताव है।
विधेयक में खनिज खोज के लिए लाइसेंस व्यवस्था को सरल बनाने तथा गहरे स्तर पर स्थित और महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी एवं विकास में निजी संस्थाओं और केंद्रीय एजेंसियों की भागीदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है। सरकार घरेलू स्तर पर ऐसे खनिजों की खोज और उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है, जिन्हें विनिर्माण, ऊर्जा संक्रमण और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 में संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन कर राज्य का आधिकारिक संवैधानिक नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव केरल विधानसभा द्वारा 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से पारित उस प्रस्ताव पर आधारित है, जिसमें राज्य का नाम बदलने की मांग की गई थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फरवरी 2026 में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य मलयालम में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले ‘केरलम’ नाम को राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप संवैधानिक मान्यता देना है। संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को कानून के माध्यम से किसी राज्य का नाम बदलने का अधिकार है। ऐसे विधेयक को पेश करने से पहले राष्ट्रपति संबंधित राज्य विधानमंडल से उसके विचार मांगते हैं, हालांकि राज्य विधानमंडल की राय संसद के लिए बाध्यकारी नहीं होती। नाम परिवर्तन दोनों सदनों से विधेयक पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही प्रभावी होगा।
चौथा विधेयक, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) के दायरे और वित्तीय शक्तियों का विस्तार करने से संबंधित है। इसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र के वित्तपोषण और विकास में NCDC की भूमिका को व्यापक बनाना है।
प्रस्तावित संशोधनों के तहत NCDC को सहकारी क्षेत्र के विकास से जुड़े अधिक व्यापक समूह के संस्थानों को प्रत्यक्ष ऋण, अनुदान और अन्य वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की अनुमति होगी। इसमें कुछ अपंजीकृत और विशेष प्रकार के संगठन भी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य वित्तीय सहायता के लिए राज्य सरकारों या पंजीकृत सहकारी समितियों पर मौजूदा निर्भरता को कम करना है।
विधेयक में केंद्र सरकार की मंजूरी से NCDC को सहकारी समितियों और क्षेत्रीय विकास से जुड़े अन्य संस्थानों की शेयर पूंजी में भाग लेने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा ‘खाद्य पदार्थ’ की परिभाषा सहित कुछ अन्य प्रावधानों में बदलाव तथा औद्योगिक वस्तुओं के लिए सहायता से संबंधित पुराने भौगोलिक प्रतिबंधों को हटाने का प्रस्ताव किया गया है।
चारों विधेयकों को लोकसभा में उस समय पेश किया गया जब मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के विरोध के कारण सदन में लगातार व्यवधान जारी है। मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और इसके 13 अगस्त तक चलने का कार्यक्रम है।
सत्र के दौरान NEET-UG परीक्षा विवाद सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों ने विरोध किया है। राजनीतिक गतिरोध के बीच सरकार ने अपना विधायी एजेंडा जारी रखा है और कई आर्थिक, प्रशासनिक एवं नियामकीय उपायों से जुड़े विधेयक पेश किए तथा उन पर आगे की कार्रवाई की है।
सोमवार को चार विधेयकों की पेशी के साथ सरकार के मानसून सत्र के अंतिम दिनों के विधायी कार्यक्रम में न्यायाधिकरणों में सुधार, खनिज नियमन में बदलाव, केरल के नाम परिवर्तन और NCDC की शक्तियों के विस्तार से जुड़े प्रस्ताव शामिल हो गए हैं।