राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने गुरुवार को यहां नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (RSS) में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जनरेशन Z (Gen Z) और जनरेशन अल्फा (Gen Alpha) पिछली पीढ़ियों की तुलना में अधिक ईमानदार और अधिक देशभक्त हैं।
एक प्रश्न के उत्तर में भागवत ने कहा कि केवल विरोध प्रदर्शन करने के कारण जनरेशन Z को राष्ट्रविरोधी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि यह देश की अपनी नई पीढ़ी है और उससे संवाद बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जैसे युवाओं को पुरानी पीढ़ी को समझना चाहिए, वैसे ही पुरानी पीढ़ी को भी युवाओं की सोच और भावनाओं को समझने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनके अनुभव के अनुसार जनरेशन Z और जनरेशन अल्फा उनकी पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार हैं और उनमें देशभक्ति की भावना भी अधिक प्रबल है।
विरोध प्रदर्शनों पर अपनी राय रखते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि यदि युवा अपनी आवाज उठा रहे हैं तो उसके पीछे कोई वास्तविक समस्या अवश्य होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि यह भी देखना जरूरी है कि विरोध प्रदर्शन किस प्रकार किए जा रहे हैं।
Mohan Bhagwat ने कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या समूह का विरोध नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि संवाद में कमी नहीं होती तो आंदोलन की स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।
उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन भी संवाद का एक माध्यम हैं। लोकतंत्र में चर्चा और संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की कठिनाई है तो उसका समाधान बातचीत से संभव है और लोकतंत्र में विरोध भी चर्चा की प्रक्रिया का हिस्सा है।
जब उनसे छात्र आंदोलनों के दौरान लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पहले यह समझना आवश्यक है कि ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई और किन परिस्थितियों में यह कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि उसके बाद ही यह तय किया जा सकता है कि गलती कहां हुई। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर उनकी जानकारी समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों पर आधारित है।
शिक्षा पूरी करने के बाद युवाओं को मनचाहा रोजगार नहीं मिलने तथा अमीर और गरीब के बीच बढ़ती खाई से जुड़े प्रश्न पर श्री भागवत ने कहा कि समाज को अपनी सोच बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि रोजगार का अर्थ केवल नौकरी नहीं होता और युवाओं को उद्यमिता की ओर भी बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज में शारीरिक श्रम करने वालों को पर्याप्त सम्मान नहीं मिलता। इसी कारण अधिकतर लोग विशेष रूप से सरकारी नौकरियों के पीछे भागते हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज की सोच बदलेगी तो रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।
शिक्षा बजट बढ़ाने के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर आरएसएस प्रमुख ने कहा कि वह शिक्षा पर अधिक खर्च किए जाने के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि केवल सरकार के प्रयासों से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव संभव नहीं है, बल्कि समाज की भी इसमें समान भागीदारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के भविष्य को लेकर समाज में जागरूकता और उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार जनता की अपेक्षाओं की अनदेखी नहीं कर सकती।
देश के अनेक विद्यालयों में बालिकाओं के लिए शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का उल्लेख किए जाने पर श्री भागवत ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं का समाधान किसी एक कदम से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवसाय का माध्यम नहीं बननी चाहिए, बल्कि यह सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए और इसके लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसे गांव देखे हैं, जहां लोगों ने मिलकर विद्यालयों की सुविधाओं में सुधार किया है।
समलैंगिक विवाह को वैध बनाने से जुड़े प्रश्न पर श्री भागवत ने कहा कि एलजीबीटीक्यू समुदाय भी समाज का हिस्सा है, लेकिन विवाह एक अलग विषय है। उन्होंने कहा कि विवाह एक ऐसी संस्था है, जिसकी परिकल्पना परिवार के लिए की गई है।
उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी के लिए परिवार की अवधारणा को समझना आवश्यक है और इसमें माता-पिता दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है और यदि इसमें कोई नया परिवर्तन करना हो तो पहले समाज को उसके लिए तैयार करना होगा।
आरएसएस की सर्वोच्च नीति-निर्माण इकाई में महिलाओं की भागीदारी को लेकर पूछे गए प्रश्न पर श्री भागवत ने कहा कि संघ से जुड़े विभिन्न संगठनों में महिलाएं समान रूप से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए अलग संगठन बनाया गया है और वे विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि शीर्ष स्तर पर उनके विचारों को भी महत्व दिया जाता है और निर्णय प्रक्रिया में उनका दृष्टिकोण शामिल किया जाता है।