वाराणसी: प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के पूर्वोत्तर रेलवे के मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम अब बनारस हो गया है। इस बदलाव के लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपनी मंजूरी दे दी है। इस बदलाव के लिए गृह मंत्रालय द्वारा आदेश पत्र 18 अगस्त को जारी कर दिया गया था। अन्य बाकी कागज़ी तैयारी के पूरे हो जाने के बाद अब मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बनारस कर दिया गया है। इसके लिए राज्यपाल ने भी स्वीकृति दे दी है।
इस नए परिवर्तन की जानकारी देते हुए रेलमंत्री पीयूष गोयल ने अपने ट्वीट में लिखा है कि ‘प्रधानमंत्री जी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम अब पूरे देश में नए और प्रसिद्ध नाम बनारस से जाना जाएगा। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा केंद्र सरकार के अनापत्ति पत्र के आधार पर इस स्टेशन का नाम परिवर्तित कर बनारस रखने की अनुमति दी गई’।
PM @NarendraModi जी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के मंडुआडीह स्टेशन को अब पूरे देश में लोकप्रिय, व प्रसिद्ध नाम बनारस से जाना जायेगा।
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) September 17, 2020
उत्तर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल द्वारा, केंद्र सरकार के अनापत्ति पत्र के आधार पर, इस स्टेशन का नाम परिवर्तित कर बनारस रखने की अनुमति दी गयी। pic.twitter.com/cYfN9up1Fl
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया था कि मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बनारस करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया है। मंडुआडीह रेलवे स्टेशन पर कुल आठ प्लेटफॉर्म है। सबसे महत्वपूर्ण वाराणसी-नई दिल्ली की ट्रेन शिवगंगा एक्सप्रेस, ग्वालियर के लिए बुंदेलखंड एक्सप्रेस एवं आधा दर्जन से अधिक अन्य प्रमुख ट्रेनों को चलाया जाता है।
बता दें कि किसी भी स्थान का नाम बदलने के प्रस्ताव को रेल मंत्रालय, डाक विभाग और सर्वे ऑफ इंडिया से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के बाद ही मंजूरी दी जाती है। किसी गांव या शहर या नगर का नाम बदलने के लिए शासकीय आदेश की जरूरत होती है। किसी राज्य के नाम में बदलाव के लिए संसद में साधारण बहुमत से संविधान में संशोधन की जरूरत होती है।