नयी दिल्ली : वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने कोरोना के कारण राजस्व संग्रह में कमी आने से राज्यों को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति की भरपाई के लिए जुलाई 2022 के बाद भी जीएसटी क्षतिपूर्ति को लागू रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही इस मद में चालू वित्त वर्ष में अब तक जमा 20 हजार करोड़ रुपये को आज ही रात में राज्यों को हस्तातंरित करने का भी फैसला लिया गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आज हुई परिषद की 42वीं बैठक में ये निर्णय लिये गये। सुबह 11 बजे से शाम सात बजे तक चली इस बैठक में कोरोना के कारण राज्यों के राजस्व में आयी कमी की भरपाई के लिए 41वीं बैठक में सुझाये गये दो विकल्पों में से एक विकल्प को 20 राज्यों को चुनने के बाद भी इस पर सहमति नहीं बन सकी और फिर से 12 अक्टूबर को परिषद बैठक होगी।
श्रीमती सीतारमण ने यहां संवाददाताओं को बताया कि क्षतिपूर्ति अधिभार मद में चालू वित्त वर्ष में अब तक संग्रहीत करीब 20 हजार करोड़ रुपये आज रात में ही राज्यों को हस्तातंरित कर दिया जायेगा। इसके साथ ही अगले एक सप्ताह में आईजीएसटी मद में जमा करीब 25 हजार करोड़ रुपये हस्तातंरित किये जायेंगे।
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि राजस्व में कमी और कोरोना के प्रभाव के कारण करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये ऋणपत्र के माध्यम से जुटाने पड़ेंगे। हालांकि राज्यों पर इसका कोई बोझ नहीं पड़ेगा और इसकी भरपाई क्षतिपूर्ति अधिभार पांच वर्ष के बाद भी लगाकर पूरी की जायेगी। जीएसटी जुलाई 2017 में लागू हुआ था। इसके कारण राज्यों के राजस्व में आने वाली कमी के लिए जीएसटी क्षतिपूर्ति अधिभार पांच वर्षों तक लगाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन उस समय किसी ने कोरोना जैसी स्थिति की कल्पना भी नहीं की थी। इसी को ध्यान में रखते हुये जीएसटी क्षतिपूर्ति अधिभार को पांच वर्ष के बाद जुलाई 2022 के आगे भी लगाया जायेगा और इससे मिलने वाली राशि से 1.10 लाख करोड़ रुपये के ब्याज और मूलधन आदि का भुगतान किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि जीएसटी संविधान संशोधन में राज्यों को क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान है और इससे केन्द्र कभी भी नहीं मुकरा है। राज्यों को क्षतिपूर्ति राशि दी जायेगी। अब 12 अक्टूबर को होने वाली बैठक में इस संबंध में विस्तार से चर्चा के बाद निर्णय लिये जायेंगे।
उन्होंने कहा कि जिन राज्यों ने बाजार से राशि जुटाने का विकल्प नहीं चुना है उनके लिए भी व्यवस्था की जायेगी और अगली बैठक में इस पर निर्णय लिया जायेगा।
उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी और उसके समर्थित राज्यों की सरकारों ने बाजार से राशि जुटाने के विकल्प का चयन किया है जबकि कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों ने इस विकल्प को नहीं चुना है और वे केन्द्र पर धनराशि जुटाकर देने का दबाव दे रहे हैं।