आरक्षण को लेकर आए दिन हमारे देश में जगह-जगह लोग संघर्ष करते नजर आते है. समय-समय पर लोग आरक्षण प्राप्त करने के लिए धरना प्रर्दशन करते है. आरक्षण ऐसा मुद्दा है जिसका लालच देकर आम जनता से हमारे देश के नेता वोट बटोरने का काम करते हैं. जब-जब हमारे देश में चुनावी माहौल का बिगुल बजता है वैसे ही आरक्षण का जिन्न बोतल से बाहर आता हुआ दिखाई देता है.
राजस्थान में गुर्जर आरक्षण ने एक बार फिर तुल पकड़ लिया है. गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने ढाई साल बाद एक बार फिर से भरतपुर के बयाना के अड्डा गांव में गुर्जर महापंचायत बुलाई है. गुर्जर संघर्ष समिति के नेताओं का कहना है कि गुर्जर बहुल 80 गांव के लोगों को बुलाया गया है. इसमें करीब 20 हजार लोग शामिल होंगे.
राजस्थान हाईकोर्ट ने गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति को महापंचायत बुलाने की अनुमति दे दी है। लेकिन महापंचायत बुलाने के लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। पहली शर्त यह है कि गुर्जर समाज को इसके लिए जिला कलेक्टर को एक उपक्रम सौंपना होगा और दूसरी शर्त यह है कि इस महापंचायत में 100 से अधिक लोगों को अनुमति नहीं दी जाएगी। राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब गुर्जर समाज ने आज से महापंचायत बुलाने का फैसला किया है।
इस बीच, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुर्जर संघर्ष समिति के सदस्यों से वार्ता के लिए सीनियर आईएएस अफसरों के अलावा भरतपुर और करौली कलेक्टर को मौके पर भेज दिया है.
पिछली बार की तोड़फोड़ को देखते हुए प्रशासन ने बयाना बैर रुपावास भुसावल समेत करौली और भरतपुर के कई इलाकों में शुक्रवार की रात 12:00 बजे से लेकर शनिवार की रात 12:00 बजे तक इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थीं. करीब 2500 सुरक्षाबलों को पूरे इलाके में तैनात किया गया है.
Rajasthan: 2G/3G/4G data internet services, WhatsApp, Facebook, Twitter & other social media (except voice calls) suspended from midnight of 16th Oct to midnight of 17th Oct in Bayana, Weir, Bhusawar & Rupwas of Bharatpur district in wake of Gujjar Mahapanchayat called tomorrow.
— ANI (@ANI) October 16, 2020
बीते दिनों गुर्जरों में बैठक करके राजस्थान सरकार को 17 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम दिया था। 17 अक्टूबर को सवाई माधोपुर के मलारना डूंगर में गुर्जरों की महापंचायत की घोषणा की गई थी। हाल ही में गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने पत्रकार वार्ता कर मलारना डूंगर की बजाय पीलूपुरा में महापंचायत किए जाने की जानकारी दी थी।
इस बार इनकी सबसे प्रमुख मांग केंद्र की बीजेपी सरकार से है कि जो आरक्षण की व्यवस्था राजस्थान में की गई है, उसे केंद्र की नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाए ताकि कोर्ट में इस पर कोई विपरीत फैसला नहीं आए. बैकलॉग की भर्तियां निकालकर उसमें भी 5 फीसदी आरक्षण नियमानुसार दिया जाए. विशेष आरक्षण कोटे से भरते हुए 1252 कर्मचारियों को नियमित किया जाए.
इनकी मांग है कि आंदोलन के दौरान शहीद हुए लोगों को नौकरी और मुआवजा दिया जाए, गुर्जरों के लिए लागू देवनारायण योजना को सही ढंग से लागू किया जाए और गुर्जर आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमा वापस हो. इस बार भी गुर्जर आंदोलन का केंद्र पीलू का पूरा रखा गया है. इसी इलाके में गुर्जर आंदोलन होते रहे हैं.