हाथरस: हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार बुधवार को तड़के उसके पैतृक स्थान पर किया गया. आधी रात के बाद दिल्ली से करीब 200 किलोमीटर दूर हाथरस में युवती के शव को उसके गांव ले जाया गया. जैसा कि उसके परिवार और ग्रामीणों को संदेह था कि यूपी पुलिस अभी अंतिम संस्कार पूरा करना चाहती थी. आधी रात में उन्होंने जोर देकर कहा कि यह उनकी परंपरा के खिलाफ है. लड़की के पिता ने पुलिस से उसे घर ले जाने और सुबह उसका अंतिम संस्कार करने की अपील की.
एंबुलेंस के पहुंचते ही लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. लोगों की पुलिसवालों से झड़प होने लगी. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को दूर धकेल दिया. अंतिम संस्कार के मैदान की ओर जाने से पहले पुलिस वाहन को कई स्थानों पर रोका गया.

जिला मजिस्ट्रेट प्रवीण कुमार लक्ष्कर से भी अपील की गई कि वह उनके शव को अंतिम संस्कार के लिए उनके घर ले जाएं. 2:30 बजे जब उसका अधिकांश परिवार घर पर था तब पुलिस ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया.
अपने अकथनीय कृत्यों को जारी रखते हुए हाथरस पुलिस ने पत्रकारों, परिवार और ग्रामीणों को दूर रखने के लिए एक मानव श्रृंखला बनाई. केवल पुलिस वाले ही मौजूद थे. उसका परिवार उसे अंतिम बार नहीं देख सका. उन्हें कथित तौर पर घर में बंद कर दिया गया था. पुलिस ने खुद ही चिता को आग लगा दी.
लड़की के पिता का कहना है कि उन्हें घर में बंद कर दिया गया था और पुलिस डेडबॉडी को ले गई. उन्होंने नहीं देखा कि यह किसकी बॉडी है. साथ ही चश्मदीदों का कहना है कि पुलिस ने परिवारवालों को अंदर बंद कर दिया और बाद में बाहर पुलिस खड़ी हो गई.
यूपी पुलिस पूरे मामले पर जांच कर रही है. उन्होंने शुरू में हत्या का एक मामला दर्ज किया लेकिन युवती के औपचारिक बयान के बाद ही बलात्कार के आरोप जोड़े. कल एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है और वे फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं.
गौरतलब है कि सामूहिक दुष्कर्म का शिकार हुई युवती ने मंगलवार तड़के दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया था.