Hemant Soren झारखंड में कल्पना सोरेन को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देकर दिखाएं: हिमंत विश्वशर्मा

POLITICS प्रादेशिक समाचार
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Hemant Soren को असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्वशर्मा ने खुली चुनौती दी है। असम के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के झारखंड चुनाव सह प्रभारी हिमंत विश्वशर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जिस दिन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को झारखंड में अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रदान करेंगे उसी दिन असम के संताल और उरांव प्रवासियों को भी अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रदान कर दिया जाएगा।

श्री विश्वशर्मा ने आज यहां विशेष बातचीत में कहा कि असम और झारखंड में दो कानून नहीं है पहले हेमंत सोरेन अपने घर में कल्पना सोरेन को आदिवासी का दर्जा देकर दिखाएं और आदिवासियों के लिए सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ायें। उन्होंने कहा कि कल्पना सोरेन क्यों नहीं आदिवासियों के लिए सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ सकती हैं, यह भी यह भी हेमंत सोरेन को बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और हेमंत सोरेन भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और इसी कारण उन्हें जेल जाना पड़ा।

श्री विश्वशर्मा ने कहा कि न्यायालय ने हेमंत सोरेन को जेल भेजने का काम किया और आज न्यायालय ने ही उन्हें जमानत पर रिहा किया है, इसमें भारतीय जनता पार्टी की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भ्रष्टाचार करेगा उसे जेल जाना पड़ेगा। हेमंत सोरेन झारखंड स्टेट बनाने के लिए जेल नहीं गए थे, बल्कि भ्रष्टाचार के कारण जेल गए थे। झामुमो भ्रष्टाचार को मेनस्ट्रीम में लाना चाहती है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ऐसा नहीं होने देगी, क्योंकि उसका मानना है सरकार का पैसा जनता का है और जनता की भलाई पर ही खर्च होना चाहिए।

श्री विश्वशर्मा ने कहा कि झारखंड की जनता राज्य में बदलाव चाहती है, युवा आक्रोश में हैं, नौकरियां नहीं मिल रही है, परीक्षाएं ठीक ढंग से नहीं हो रही हैं, इसलिए इस बार के आगामी झारखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा का सफाया होगा। उन्होंने कहा कि मईया योजना में महिलाओं को पांच साल का पैसा मिलना चाहिए था, लेकिन अब चुनाव आने पर हेमंत सरकार ने 1000-1000 रुपये दिये हैं और वह पैसा लेने के लिए भी महिलाओं को 300-300 रुपये देने पड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा में हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन केवल एक दूसरे की बात करते हैं और दोनों एक दूजे के लिए बने हैं तथा मियां बीवी केवल अपनी बात करते हैं उन्हें जनता से कोई मतलब नहीं।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिका जाने के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी संविधान बचाने की बात कहना बंद कर दिए हैं, क्योंकि तीन महीने से ज्यादा वह किसी चीज पर टिकते ही नहीं है। उन्होंने कहा कि ओबीसी की बात करने वाले राहुल गांधी पहले अपनी पार्टी में भी ओबीसी को स्थान देते और लोकसभा में विपक्ष का नेता किसी ओबीसी को बनाते, लेकिन उनकी कथनी और करनी में फर्क है क्योंकि उस परिवार में ‘गांधी फर्स्ट, ओबीसी पीछे’ है जबकि भारतीय जनता पार्टी में ओबीसी सबसे आगे है इसलिए आज ओबीसी का बेटा देश का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं।

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