कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने सोमवार को आरोप लगाया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लागू किए गए विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) के पहले महीने में ही इसके परिणाम सामने आने लगे हैं और जुलाई 2026 में पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में ग्रामीण रोजगार में तेज गिरावट दर्ज की गई है।
रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि नई व्यवस्था के पहले महीने के रोजगार आंकड़ों में काम पाने वाले परिवारों की संख्या और रोजगार के लिए सृजित मानव-दिवस, दोनों में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि जुलाई 2026 में ग्रामीण रोजगार के आंकड़े जुलाई 2025 की तुलना में काफी कम रहे।
कांग्रेस नेता द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में जुलाई 2025 की तुलना में रोजगार के मानव-दिवस में 49.94 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि रोजगार का लाभ उठाने वाले परिवारों की संख्या 51.45 प्रतिशत कम रही। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि एक महीने के दौरान रोजगार के लगभग 50 प्रतिशत कम मानव-दिवस सृजित हुए।
रमेश ने कहा कि विपक्षी दलों और कांग्रेस ने मनरेगा को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू किए जाने के समय ही इसके संभावित परिणामों को लेकर आशंका जताई थी। उन्होंने दावा किया कि शुरुआती रोजगार आंकड़े विपक्ष की चिंताओं को सही साबित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मनरेगा और नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बुनियादी अंतर है। मनरेगा ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता था और योजना के क्रियान्वयन में ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने कहा कि मनरेगा की भावना ग्रामीण श्रमिकों को सरकार के राजनीतिक निर्णयों पर निर्भरता से मुक्त करना थी।
कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर नई योजना को केंद्रीकृत करने और राज्यों पर अधिक वित्तीय बोझ डालने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि तकनीक और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पर बढ़ती निर्भरता के कारण ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार तक पहुंच मुश्किल हुई है तथा उनके अधिकारों का दावा करना भी कठिन हो गया है।
रमेश ने VB-G RAM G को ‘‘रोजगार चोरी’’ करार देते हुए कहा कि शुरुआती रोजगार आंकड़े मनरेगा को हटाए जाने को लेकर विपक्ष की आशंकाओं की पुष्टि करते हैं।
केंद्र सरकार ने एक जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह VB-G RAM G व्यवस्था लागू की है। सरकार का कहना है कि नई योजना का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार सृजन को विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य से जोड़ना है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस बदलाव का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि इससे रोजगार की कानूनी गारंटी कमजोर होती है और राज्यों पर अधिक वित्तीय जिम्मेदारी आती है।