महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सरकारी बंगले के किराया वसूली मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा अदालत की अवमानना के नोटिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और राज्यपाल के तौर पर मिली इम्यूनिटी का हवाला देकर अवमानना कार्रवाई पर रोक की मांग की है।
श्री कोश्यारी ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए कहा है कि हाईकोर्ट का फैसला प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है, क्योंकि उनका पक्ष नहीं सुना गया। इतना ही नहीं राज्यपाल होने के कारण उन्हें संविधान द्वारा अदालती कार्रवाई से संरक्षण प्राप्त है।
श्री कोश्यारी ने कहा कि उनके बंगले के बकाये किराये के तौर पर 47 लाख रुपये से अधिक की राशि निर्धारित की गयी है और वह बाजार मूल्य से बहुत अधिक है और इसका एकतरफा निर्धारण किया गया है। उन्होंने याचिका में यह भी कहा है कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं दिया गया।
राज्यपाल ने कहा कि अदालत की अवमानना का नोटिस जारी करते हुए हाईकोर्ट ने अपने विवेक का इस्तेमाल भी नहीं किया। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक की मांग करते हुए कहा कि चूंकि वह महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं, इसलिए उन्हें संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत इम्यूनिटी प्राप्त है। इस अनुच्छेद के प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति और राज्यपाल को इस तरह के मुकदमों से संरक्षण प्राप्त होता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अमन सिन्हा के श्री कोश्यारी की ओर से पैरवी करने के आसार हैं।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी, जिसने किराया नहीं दिये जाने पर पूर्व सीएम के खिलाफ हाईकोर्ट की अवमानना कार्रवाई पर रोक लगाई थी तथा उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अन्य समान याचिकाओं के साथ सम्बद्ध कर दिया था।