गुंजन मिश्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Modi) ने शनिवार को जी-7 शिखर सम्मेलन (कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका का ग्रुप) के आउटरीच सत्र को अपने आभासी संबोधन में ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ का Modi Mantra दिया। प्रधानमंत्री के संदेश को तत्काल समर्थन जर्मन चांसलर एन्जेला मार्केल से मिला। हालाँकि भारत जी-7 का सदस्य नहीं है, लेकिन मेजबान देश ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन द्वारा गैर-सदस्य देशों को भी निमंत्रित किया गया है, जिनमें भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, साउथ कोरिया, साउथ अफ्रीका भी शामिल है।
वन हेल्थ – लोगों, जानवरों, पौधों, पर्यावरण के बीच मूलभूत अंतर्संबंधों को पहचानते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र- 2030 सतत विकास लक्ष्यों में शामिल करने और इस दिशा में काम करने की आवश्यकता है। अब समय आ चुका है कि हम प्राकृतिक संसाधनों के दोहन, शोषण के अपने वर्तमान दृष्टिकोण को बदलें और सभी के कल्याण, साझा समृद्धि और सामाजिक स्थिरता के लिए प्रयासरत रहें।
जैसे-जैसे मानव और पर्यावरणीय सम्बन्धों की जानकारी बढ़ती गयी कई लोगों द्वारा ‘एक स्वास्थ्य, एक पृथ्वी’ की अवधारणा का समर्थन किया गया। सार्वजनिक स्वास्थ्य में प्रशिक्षित एक पशु चिकित्सक केल्विन श्वाबे ने 1964 में एक पशु चिकित्सा पाठ्यपुस्तक में वन मेडिसिन शब्द गढ़ा, जो पशु और मानव चिकित्सा के बीच समानता को दर्शाता है और वैश्विक स्वास्थ्य समस्याओं को हल करने में मदद करने के लिए पशु चिकित्सकों और चिकित्सकों के बीच सहयोग के महत्व पर जोर देता है।
हमारे ग्रह पर मानवीय दबाव बढ़ता जा रहा है, हमारे जीवन के तरीके की स्थिरता, विकास के लिए हमारा निरंतर दबाव और तथाकथित प्रगति खतरे में है। पारिस्थितिकी तंत्र में गिरावट और जलवायु परिवर्तन की वास्तविकता में मानव योगदान अब बहस का विषय नहीं है। पहले से ही दुनिया के विभिन्न हिस्सों के देश सूखे, अकाल, संघर्ष, महामारी और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण आबादी का समर्थन करने में असमर्थ हैं। वन हेल्थ दृष्टिकोण साझा स्वास्थ्य खतरों जैसे कि जूनोटिक रोगों, रोगाणुरोधी प्रतिरोध, खाद्य सुरक्षा और अन्य को संबोधित करने के लिए मानव-पशु-पर्यावरण इंटरफेस में समन्वय, सहयोग और संचार में सुधार करके वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा का समर्थन करता है।
भारत के इतिहासिक, धार्मिक, व पर्यावरणीय महत्व को ध्यान में रखते हुए वन हेल्थ प्रोग्राम इस क्षेत्र के लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि वन हेल्थ लोगों, जानवरों, पौधों और उनके साझा वातावरण के बीच अंतर्संबंध को पहचानने के लिए इष्टतम स्वास्थ्य परिणामों को प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तरों पर काम करने वाला एक सहयोगी, बहुक्षेत्रीय और ट्रांसडिसिप्लिनरी (अंतःविषय) दृष्टिकोण है। वैज्ञानिकों के अनुसार वन्यजीवों में 17 लाख से अधिक वायरस होते हैं, और उनमें से कई के जूनोटिक होने की संभावना है। इसके अलावा रोगों की एक अन्य श्रेणी, “एंथ्रोपोज़ूनोटिक” संक्रमण, मनुष्यों से जानवरों में होती हैं।
एक स्वास्थ्य का दायरा कृषि उत्पादन और भूमि उपयोग, जैव विविधता / प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, रोग की रोकथाम और प्रतिक्रिया के लिए जैव निगरानी, जलवायु परिवर्तन, मानव, पशु एवं पौधों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के स्वास्थ्य का अभिसरण, आपदा की तैयारी एवं प्रतिक्रिया, पर्यावरणीय स्वास्थ्य / संदूषण का पता लगाने एवं प्रतिक्रिया, खाद्य एवं जल सुरक्षा और सुरक्षा, वैश्विक व्यापार एवं वाणिज्य, मानव-पशु बंधन, पौधे और मृदा स्वास्थ्य के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।
आज आर्थिक विकास के कारण, प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कन्जर्वेशन ऑफ़ नेचर) के अनुसार दुनिया भर में 37,400 प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर हैं। इसमें स्तनधारी 26 फीसदी, उभयचर 41 फीसदी, पंछी 14 प्रतिशत, कोनिफर 34 प्रतिशत आदि शामिल हैं। पेड़-पौधों में दीमक, फंगस एवं जानवरों में भी कई तरह की बीमारियों के कारण विलुप्त हो रही प्रजातियों की संख्या बढ़ रही है। इसका मात्र एक कारण है – स्वास्थ्य पर उचित ध्यान न दे पाना।
एक स्वास्थ्य क्यों?
दुनिया भर में, पिछले तीन दशकों में सभी उभरती हुई मानव संक्रामक बीमारियों में से लगभग 75 प्रतिशत जानवरों में उत्पन्न हुई हैं। पर्यावरणीय स्वास्थ्य, प्रदूषण और खराब परिस्थितियों के माध्यम से मानव और पशु स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, जिससे नए संक्रामक कारक पैदा हो सकते हैं। विश्व की जनसंख्या 2011 में सात बिलियन थी, जिसके 2050 तक बढ़कर नौ बिलियन हो जाने का अनुमान है।
बढ़ती वैश्विक आबादी के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सेवा, भोजन और पानी प्रदान करने के लिए, स्वास्थ्य व्यवसायों और उनके संबंधित विषयों एवं संस्थानों को मिलकर काम करना चाहिए। मानव-पशु बंधन, लोगों और जानवरों दोनों के स्वास्थ्य पर लाभकारी प्रभाव डालता है।
एक स्वास्थ्य संसाधन दक्षता के माध्यम से 35 प्रतिशत आर्थिक बचत भी हासिल होती है। विश्व बैंक के विश्लेषण से पता चलता है कि जूनोटिक रोगों के उच्च आर्थिक और स्वास्थ्य बोझ को देखते हुए, रोग की रोकथाम और नियंत्रण के लिए देश स्तर पर एक स्वास्थ्य दृष्टिकोण से 30 बिलियन डॉलर से ऊपर प्रति वर्ष बचत की जा सकती है।
स्वास्थ्य जांच के लिए एक स्वास्थ्य दृष्टिकोण के साथ ठोस लाभ देखा गया।
एक प्राथमिक एक स्वास्थ्य जांच डिजाइन सांख्यिकीय शक्ति को बढ़ाकर रोगों के बारे में अधिक जानकारी इकट्ठा करने में सहयोग करता है।
हमको अब धरती पर रहने वाले प्रत्येक जीव की रक्षा के लिए कार्य करने होंगे, क्योंकि हर एक प्रजाति धरती की कुल प्रजातियों के जीवन व भाग्य का परोक्ष व अपरोक्ष रूप से निर्धारण करती है। इसके लिए जंगलों और जैवविविधता को बचाने के लिए संरक्षित क्षेत्र घोषित करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि मानवीय आधार पर इनको मानव जीवन के बराबर का दर्ज़ा देना होगा। इसमें वन हेल्थ प्रोग्राम बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
(लेखक पर्यावरणविद हैं।)