Navratri 2020: मां शैल पुत्री की पूजा आज, जानें पूजा विधि और मंत्र

राष्ट्रीय समाचार
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हिंदू धर्म में नवरात्र का काफी महत्व है। 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरू हो रहे हैं. इस दिन से लेकर पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग नौ शक्ति स्वरूपों की पूजा की जायेगी. दरअसल वर्ष में चार बार पौष, चैत्र, आषाढ और अश्विन माह में नवरात्र आते हैं. चैत्र और आश्विन में आने वाले नवरात्र प्रमुख होते हैं, जबकि अन्य दो महीने पौष और आषाढ़ में आने वाले नवरात्र गुप्त नवरात्र के रूप में मनाये जाते हैं. चूंकि आश्विन माह से शरद ऋतु की शुरुआत होने लगती है, इसलिए आश्विन माह के इन नवरात्र को शारदीय नवरात्र के नाम से जाना जाता है.

नवरात्रि में पहले दिन पूजा-पाठ में कई विशेष बातों का ध्यान रखना पड़ता है. इसका समापन 24 अक्टूबर को होगा. इस बार की नवरात्रि आठ दिन की होगी. नवरात्रि के 25 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा.

सनातन धर्म का यह एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. इसे उत्तर भारत के साथ-साथ गुजरात, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और झारखंड में धूमधाम से मनाया जाता है. इस बार नवरात्रि एक महीने की देरी से आई है.

नवरात्रि के प्रथम दिन मां के शैलपुत्री स्वरूप की उपासना होती है. हिमालय की पुत्री होने के कारण इनको शैलपुत्री कहा जाता है. पूर्व जन्म में इनका नाम सती था और ये भगवान शिव की पत्नी थी. सती के पिता दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव का अपमान कर दिया था, इसी कारण सती ने अपने आपको यज्ञ अग्नि में भस्म कर लिया था.

अगले जन्म में यही सती शैलपुत्री बनी और भगवान शिव से ही विवाह किया. माता शैलपुत्री की पूजा से सूर्य संबंधी समस्याएं दूर होती हैं. मां शैलपुत्री को गाय के शुद्ध घी का भोग लगाना चाहिए. इससे अच्छा स्वास्थ्य और मान सम्मान मिलता है.

ऐसे करें कलश स्थापना
सबसे पहले घर के ईशान कोण, यानी उत्तर-पूर्व दिशा के हिस्से की अच्छे से साफ-सफाई करके, वहां पर जल छिड़कर साफ मिट्टी या बालू बिछानी चाहिए. फिर उस साफ मिट्टी या बालू पर जौ की परत बिछानी चाहिए. उसके ऊपर पुनः साफ मिट्टी या बालू की परत बिछानी चाहिए और उसका जलावशोषण करना चाहिए. जलावशोषण का मतलब है कि उस मिट्टी की परत के ऊपर जल छिड़कना चाहिए. अब उसके ऊपर मिट्टी या धातु के कलश की स्थापना करनी चाहिए. कलश को अच्छ से साफ, शुद्ध जल से भरना चाहिए और उस कलश में एक सिक्का डालना चाहिए। अगर संभव हो तो कलश के जल में पवित्र नदियों का जल भी जरूर मिलाना चाहिए.

कलश स्थापना का मुहूर्त क्या होगा ?
कलश की स्थापना आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को की जाती है. इस बार प्रतिपदा रात्रि 09.08 तक रहेगी. कलश की स्थापना रात्रि 09.08 के पूर्व कर जाएगी. इसके चार शुभ मुहूर्त होंगे. सुबह 07.30 बजे से 09.00 बजे तक. फिर दोपहर 01.30 बजे से 03.00 बजे तक. इसके बाद दोपहर 03.00 बजे से 04.30 बजे तक. फिर शाम 06.00 बजे से 07.30 बजे तक.

जानें किस दिन की जाएगी किस देवी की पूजा
17 अक्टूबर, प्रतिपदा – बैठकी या नवरात्र का पहला दिन- घट/ कलश स्थापना – शैलपुत्री

18 अक्टूबर, द्वितीया – नवरात्र 2 दिन तृतीय- ब्रह्मचारिणी पूजा
19 अक्टूबर, तृतीया – नवरात्र का तीसरा दिन- चंद्रघंटा पूजा
20 अक्टूबर, चतुर्थी – नवरात्र का चौथा दिन- कुष्मांडा पूजा
21 अक्टूबर, पंचमी – नवरात्र का 5वां दिन- सरस्वती पूजा, स्कंदमाता पूजा
22 अक्टूबर, षष्ठी – नवरात्र का छठा दिन- कात्यायनी पूजा
23 अक्टूबर, सप्तमी – नवरात्र का सातवां दिन- कालरात्रि, सरस्वती पूजा
24 अक्टूबर, अष्टमी – नवरात्र का आठवां दिन-महागौरी, दुर्गा अष्टमी ,नवमी पूजन
25 अक्टूबर, नवमी – नवरात्र का नौवां दिन- नवमी हवन, नवरात्र पारण, दुर्गा विसर्जन, विजयादशमी

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