EMI में नहीं मिली कोई राहत, त्योहारों से पहले सस्ते लोन की उम्मीदों पर फिरा पानी

BUSINESS कारोबार समाचार
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त्‍योहारी सीजन से पहले रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बैठक के नतीजों का ऐलान हो गया है. आरबीआई गवर्नर शक्‍तिकांत दास ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के जरिए बैठक के नतीजों के बारे में जानकारी दी. भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली छह सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है.

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट को 4% और रिवर्स रेपो रेट 3.35% पर बनाए रखा है. रेपो रेट में बदलाव न होने का मतलब ये हुआ कि ईएमआई या लोन की ब्याज दरों पर नई राहत नहीं मिलेगी. रेपो रेट में कुछ बदलाव होगा, इस बात की उम्मीद पहले से भी कम थी. अगस्त में भी पॉलिसी रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ था. हालांकि फरवरी 2019 से अब तक रेपो रेट में 2.50 फीसदी की बड़ी कटौती हो चुकी है.

आपको यहां बता दें कि रिजर्व बैंक ने पहले मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक का दिन 28 सितंबर को तय किया था. लेकिन समिति के सदस्‍यों की नियुक्‍ति की वजह से बैठक को आगे के लिए टाल दिया गया था. सरकार ने एमपीसी में तीन सदस्यों की नियुक्ति कर दी है. तीन जाने माने अर्थशास्त्रियों अशिमा गोयल, जयंत आर वर्मा और शशांक भिडे को एमपीसी का सदस्य नियुक्त किया गया है. इन सदस्यों की नियुक्ति चेतन घाटे, पामी दुआ, रविन्द्र ढोलकिया के स्थान पर की गई है. इनका कार्यकाल सितंबर में पूरा हो गया था. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति के नए सदस्यों का स्वागत किया और उनका आभार प्रकट किया.

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, ‘आरबीआई आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए उदार रुख बनाए रखेगा. कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारतीय अर्थव्यवस्था निणार्यक चरण में प्रवेश कर रही है. अर्थव्यवस्था में पहली तिमाही में आई गिरावट पीछे छूट चुकी है, स्थिति में सुधार के संकेत दिखने लगे हैं. अंकुश लगाने के बजाय अब अर्थव्यवस्था को उबारने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है. चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही तक मुद्रास्फीति के तय लक्ष्य के दायरे में आ जाने का अनुमान है.’

आरबीआइ गवर्नर ने कहा, ”भय और निराशा का माहौल अब आशा में बदल रहा है। वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति में कमी आ सकती है और इसके लक्ष्य के आसपास रहने की संभावना है. विभिन्न सेक्टर्स में वेरिएशन के साथ भारत में तेज रिकवरी होने की संभावना है. कृषि, कंज्यूमर गुड्स, बिजली और फार्मा सेक्टर्स में तेज रिकवरी हो सकती है.”

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