Hiroshima, Nagasaki नहीं, America ने इस शहर पर किया था सबसे घातक हमला

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दूसरे विश्व युद्ध के दौरान America ने जापान के Hiroshima और Nagasaki पर एक-एक परमाणु बम गिराया था, जिसका असर पीढ़ियों तक दिख रहा है। इस युद्ध के दौरान अमेरिका ने जापान को पूरी तरह बर्बाद करने की रणनीति तैयार कर ली थी और उसके कई शहरों पर परमाणु बम गिराने की योजना थी। हालांकि, परमाणु बम के निशाने पर आने वाले इन शहरों में टोक्यो का नाम नहीं था। होता भी क्यों, परमाणु हमले से महीनों पहले ही अमेरिका ने इतिहास की सबसे विनाशकारी बमबारी कर टोक्यो को तबाह कर दिया था। इसे बॉम्बिंग ऑफ टोक्यो कहा जाता है।

अमेरिका ने शुरू किया था ऑपरेशन मीटिंग हाउस

‘बॉम्बिंग ऑफ टोक्यो’ को ‘ग्रेट टोक्यो एयर रेड’ के नाम से भी जाना जाता है। यह बमबारी हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले से चार महीने पहले की गई थी। दरअसल, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने दुश्मन देशों के खिलाफ एक ऑपरेशन शुरू किया था, जिसको नाम दिया गया था ऑपरेशन मीटिंग हाउस। इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिका ने अपने बी-29 विमानों को टोक्यो पर बमबारी के लिए भेजा था।

उस वक्त बी-29 विमानों का अपना ही जलवा था। यह काफी ऊंचाई तक तेज गति से बड़े-बड़े बम लेकर उड़ान भर सकते थे। इन्हें 20 साल के लगातार शोध के जरिए विकसित किया गया था और दूसरे विश्व युद्ध तक ये इस स्थिति में आ गए थे कि 18 हजार फुट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकते थे और इसके क्रू को ऑक्सीजन मास्क लगाने की जरूरत भी नहीं पड़ती थी। अत्यधिक ऊंचाई के कारण ये एंटी एयरक्राफ्ट गन की रेंज से भी बाहर होते थे और दुश्मन के लड़ाकू विमान पहुंचने तक काफी नुकसान कर जाते थे।

फेल हो गया था बी-29 विमानों का शुरुआती हमला

इसके बावजूद जब बी-29 से जापान में शुरुआती बमबारी की गई तो वह फेल बताई गई थी। तब इन विमानों ने इतनी ऊंचाई से बम गिराए कि उनमें से 20 फीसदी ही निशाने तक पहुंच पाए। इसके लिए अमेरिकी क्रू ने कम दृश्यता को जिम्मेदार ठहराया था। इसके साथ यह भी कहा गया कि इन विमानों की उड़ान के कारण उत्पन्न होने वाले तेज हवा के झोंके भी बमों को गिराने पर अपने टारगेट से भटका देते थे।

इसलिए रात में हमले का लिया गया था फैसला

इसलिए फैसला किया गया कि टोक्यो पर हमले के लिए बी-29 विमानों को 5,000 से 8,000 फुट की ऊंचाई पर उड़ाया जाएगा। इसके लिए रात का समय चुना गया, ताकि जापान को मुकाबले का कम से कम समय मिले। इन विमानों में फायर बम लोड किए गए, जिससे लकड़ी के घरों से बसे टोक्यो को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सके। 9 मार्च, 1945 की शाम को इन विमानों ने जापान से करीब 1500 मील दूर अलग-अलग आईलैंड पर बनाए गए अमेरिकी बेस से करीब सात घंटे की उड़ान भरी। देर रात जब टोक्यो के लोग गहरी नींद में सोए थे, तब पहले पांच विमानों ने टोक्यो पर पांच सेट में फायर बम गिरा कर निशान चिह्नित कर दिए, जिससे दूसरे विमानों को निशाना साधने में आसानी रहे।

डेढ़ घंटे में 1500 टन फायर बम बरसाए थे

देर रात 1ः30 बजे से सुबह 3 बजे के बीच अमेरिकी बी-29 विमानों ने पांच लाख से ज्यादा एम-69 बम टोक्यो पर बरसा दिए। इन्हें 38-38 बमों के समूह में गिराया गया, जिनका वजन छह पाउंड था। ये बम विमान से गिराते ही अलग होकर छोटे-छोटे पैराशूट के सहारे जमीन पर अपने निशाने की ओर बढ़ जाते थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी बी-29 विमानों ने उस रात जापान की राजधानी टोक्यो पर 1500 टन फायर बम बरसाए थे।

एक चौथाई से ज्यादा शहर राख में तब्दील हो गया

10 मार्च की सुबह हुई तो टोक्यो की शक्ल पूरी तरह से बदल चुकी थी। कम से कम 80 हजार से एक लाख लोगों की मौत हो चुकी थी। 10 लाख से ज्यादा घायल थे। एक चौथाई से ज्यादा शहर राख में तब्दील हो चुका था। रिपोर्ट की मानें तो इस बमबारी में टोक्यो का 15.8 वर्ग मील का क्षेत्र राख में बदल गया था. 10 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे।

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