संसद ने NCDC संशोधन विधेयक को मंजूरी दी, सहकारी समितियों को सीधे वित्तीय सहायता का रास्ता साफ

राष्ट्रीय
Spread the love

संसद ने NCDC (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। राज्यसभा ने बुधवार को इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा ने एक दिन पहले 11 अगस्त को विधेयक को मंजूरी दी थी।

यह विधेयक सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को तेज, लचीला और अधिक प्रत्यक्ष बनाने के साथ-साथ सहकारी विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की भूमिका का विस्तार करता है।

सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लोकसभा में विधेयक पेश किया था, जहां इसे 11 अगस्त को पारित किया गया। राज्यसभा की मंजूरी के साथ ही राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन करने वाले इस विधेयक पर संसद की प्रक्रिया पूरी हो गई।

संशोधन का प्रमुख प्रावधान NCDC को सहकारी समितियों और सहकारी विकास से जुड़ी अन्य संस्थाओं को सीधे ऋण और अनुदान उपलब्ध कराने का अधिकार देता है। पहले वित्तीय सहायता से जुड़े प्रस्तावों को राज्य सरकारों के माध्यम से भेजना पड़ता था, जिससे अतिरिक्त प्रक्रियाओं और देरी की संभावना रहती थी।

सरकार का कहना है कि प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता से संस्थागत धन के प्रवाह को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा और NCDC सहकारी संस्थाओं की वित्तीय जरूरतों पर तेजी से प्रतिक्रिया दे सकेगा। यह प्रावधान कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण, डेयरी और अन्य ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी सहकारी संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां समय पर पूंजी उपलब्ध होना बुनियादी ढांचे और संचालन के विस्तार के लिए आवश्यक होता है।

संशोधन में NCDC के तहत ‘‘खाद्य पदार्थ’’ की परिभाषा का भी विस्तार किया गया है। इसमें प्रसंस्कृत खाद्य और केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने वाले अन्य खाद्य उत्पादों को शामिल करने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य खाद्य क्षेत्र से जुड़ी अधिक सहकारी गतिविधियों को निगम के माध्यम से उपलब्ध वित्तीय सहायता के दायरे में लाना है।

विधेयक में औद्योगिक वस्तुओं से संबंधित कुछ भौगोलिक प्रतिबंधों को हटाने का भी प्रावधान है। संशोधित व्यवस्था के तहत कानून के प्रावधानों के अधीन NCDC स्थान की परवाह किए बिना पात्र औद्योगिक गतिविधियों को सहायता दे सकेगा। सरकार का कहना है कि इससे सहकारी संस्थाओं को क्षेत्रीय सीमाओं के बजाय आर्थिक व्यवहार्यता और संचालन संबंधी जरूरतों के आधार पर परियोजनाएं शुरू करने में मदद मिलेगी।

विधेयक में केंद्र सरकार की मंजूरी से NCDC को राज्यस्तरीय या स्थानीय सहकारी संस्थाओं की शेयर पूंजी में भाग लेने का अधिकार देने का भी प्रावधान है। इससे सहकारी संस्थाओं को संस्थागत पूंजी का एक अतिरिक्त स्रोत मिल सकता है और NCDC को उनके विस्तार, आधुनिकीकरण और विकास में सहायता करने के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे।

ये संशोधन सहकारी आंदोलन को मजबूत करने और भारत की ग्रामीण तथा कृषि अर्थव्यवस्था में इसके योगदान को बढ़ाने की केंद्र सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। सरकार हाल के वर्षों में सहकारी नेटवर्क के विस्तार, वित्त और तकनीक तक पहुंच में सुधार तथा उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण और वितरण से जुड़ी मूल्य श्रृंखलाओं में सहकारी संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर देती रही है।

सहकारिता मंत्रालय के तहत वैधानिक निकाय NCDC सहकारी कार्यक्रमों और परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए प्रमुख संस्थागत माध्यम है। इसके कार्यक्षेत्र में कृषि इनपुट और उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण, ग्रामीण उद्योग और अन्य सहकारी गतिविधियां शामिल हैं।

सरकार का कहना है कि NCDC को सीधे वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की शक्ति मिलने से सहकारी परियोजनाओं की मंजूरी और धनराशि जारी होने के बीच का समय कम होगा। इससे नई परियोजनाएं शुरू करने या मौजूदा गतिविधियों का विस्तार करने वाली सहकारी संस्थाओं को अधिक वित्तीय लचीलापन मिलने की उम्मीद है।

विधेयक का पारित होना संसद के दोनों सदनों में जारी व्यवधानों के बीच हुआ। लोकसभा ने मंगलवार को विपक्ष के विरोध के बीच इसे पारित किया था। बुधवार को राज्यसभा में भी अलग-अलग राजनीतिक मुद्दों को लेकर विपक्षी सदस्यों ने विरोध किया और बाद में विधेयक से अलग मुद्दों को लेकर सदन से वॉकआउट किया।

विरोध के बावजूद विधेयक को मतदान के लिए लिया गया और उच्च सदन ने इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया। सरकार ने इस सुधार को सहकारी संस्थाओं को अधिक वित्तीय रूप से सक्षम बनाने और विशेष रूप से ग्रामीण भारत में आर्थिक विकास में उनकी भूमिका बढ़ाने के प्रयास के रूप में पेश किया है।

संसद से विधेयक की मंजूरी सहकारी क्षेत्र में सुधार के सरकार के एजेंडे की दिशा में एक और कदम है। हालांकि, नई व्यवस्था की प्रभावशीलता इसके क्रियान्वयन और सहकारी समितियों द्वारा विस्तारित वित्तीय सुविधाओं का सतत विकास, आधुनिकीकरण और रोजगार सृजन वाली आर्थिक गतिविधियों के लिए प्रभावी उपयोग करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *