अवधेश वर्मा, लेखक (लव यू पापा और माटी से मुकुट तक)Politics में अपनी छाप छोड़ने वाले उत्तरप्रदेश के सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा की जीवनी पर आधारित किताब ‘माटी से मुकुट तक’ में उनके बचपन से अब तक के संघर्ष की कहानी लिखी गई है। लेखक अवधेश वर्मा ने पुस्तक में सहकारिता मंत्री के जीवन संघर्ष और उनके गांव की माटी से निकलकर सत्ता के मुकुट तक पहुंचने की यात्रा को बहुत खूबसूरती से दर्शाया है। किताब में आप सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा के छात्र जीवन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में पदार्पण, वकालत व राजनीतिक जीवन से कैबिनेट मंत्री बनने तक के सफर के वर्णन को विस्तृत रूप से पढ़ सकते हैं। इस किताब को लेकर हमारे सहयोगी सत्यम ने लेखक अवधेश वर्मा से बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत का अंश…
लेखन की प्रेरणा आपको कहां से मिली
?
सच कहूं तो मैं कभी लेखक था ही नहीं न ही स्वयं को मैं लेखक मानता हूं। यह आप सभी पाठकों का प्यार है जो मुझे एक लेखक के तौर पर स्थापित करता है। मैं ग्रुजेएट होने तक सही से हिंदी पढ़ना नहीं जानता था, लिखना तो दूर की बात है। पत्रकारिता के दौरान मैं ऐसे संस्थान का हिस्सा बना जो विश्व में अपनी संस्कृति और आध्यात्म के लिए विख्यात है। देव संस्कृति विश्वविद्यालय नर से नारायण बनाने की टकसाल के रूप में जाना जाता है। मैं उसी बाग में पल्लवित और परिपोषित होने वाला पुष्प रहा हूं। मुझे आप सभी पाठकों के स्नेह, और उत्साहवर्धन ने लेखक के तौर पर स्थापित किया।
आप बचपन से लेखक बनना चाहते थे या यह संयोग मात्र है
?
सही मायने में मैंने कभी सोचा ही नहीं था कि कभी लेखक बनूंगा। बचपन से लिखने-पढ़ने में मन नहीं लगता था। पत्रकारिता के दौरान एक प्रतियोगिता हुई थी जिसमें मैंने एक कहानी लिखी थी। उस कहानी को काफी सराहा गया। कुछ गुरुजनों के लगातार मार्गदर्शन और मित्रों के उत्साहवर्धन ने मुझे लेखन के प्रति नैतिक बल प्रदान किया और मैं संयोग से लेखक बन गया।
लव यू पापा आपकी पहली कृति थी जिसे पाठकों ने खूब प्यार दिया इस सफलता को कैसे देखते है आप?
जब मैंने लव यू पापा लिखना शुरू किया तो मुझे इस पुस्तक को लिखने में 3 वर्षों का समय लगा क्योंकि मैं बस लिखने का प्रयास कर रहा था और लिखना सीख रहा था। जैसे-तैसे पहली पुस्तक लिखी, मुझे उम्मीद नहीं थी कि पाठकों को मेरी पहली कृति इतना पसंद आयेगी। लव यू पापा को मैं अपने लेखन का आधार मानता हूं। बहुत सारी गलतियों के बाद भी पाठकों ने लेखन के भाव को समझा और खूब सराहा। मुझे बहुत प्रसन्नता हुई कि मेरे मेहनत को सार्थक प्रतिफल मिला।
आपके जीवन का कोई यादगार वाकया?
जब मैं लव यू पापा लिख रहा था। उस समय मेरे बहुत से मित्रों को ही भरोसा नहीं था कि मैं लिख पाऊंगा। लोग मेरी हंसी उड़ाते थे कि लेखक साहब जा रहे है। मेरे रिश्तेदारों ने भी मेरा खूब मजाक बनाया किन्तु मैं अपने संकल्प से डिगा नहीं, लगातार प्रयास करता रहा। जिसकी परिणीत के रूप में ‘लव यू पापा’ और ‘माटी से मुकुट तक’ आपके सामने है। अब वही लोग मेरी प्रशंसा करते नहीं थकते हैं।
लेखन के अलावा आपके क्या क्या शौक हैं?
लेखन तो मेरे जीवन का आधारभूत स्तंभ है। मैं पहले पढ़ने में रुचि नहीं लेता था। किन्तु अब जब भी खाली समय मिलता है, समकालीन लेखकों और हमें प्रेरणा देने वाले लेखकों को पढ़ता हूं। लिखने से पहले मैंने लगभग 100 किताबें अलग-अलग विधा की पढ़ी है। जिससे मेरे शब्दकोश में काफी सुधार हुआ है। इसके अलावा फिल्में देखना और गाना सुनना मुझे पसंद है। क्रिकेट से बहुत लगाव था किन्तु समय के साथ-साथ क्रिकेट मुझसे दूर होता चला गया।
खाली समय में किसको पढ़ना पसंद करते है?
वैसे तो मैं सभी लेखकों को समान दृष्टि से देखता हूं। समकालीन लेखकों में ओम प्रकाश राय मुझे काफी अच्छे लगते है इसके अतिरिक्त नवीन चौधरी और सचिन देव शर्मा की लेखनी भी मुझे प्रभावित करती है। मुझे धर्मवीर भारती, प्रेमचंद्र, मनोहर श्याम जोशी, गुलशन नंदा, मैक्सिम गोर्की की पुस्तकों से काफी कुछ सीखने को मिला है।
माटी से मुकुट तक कि सफलता को कैसे देखते है?
माटी से मुकुट तक उत्तर प्रदेश सरकार में सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा की जीवन गाथा है। मुझे लगता है कि राजनीति में विशेष रुचि लेने वाले पाठकों को यह पुस्तक एक बार अवश्य पढ़नी चाहिए क्योंकि यह पुस्तक संघर्षों के मध्य सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने की यात्रा से आपको बाखूबी से परिचित करवायेगी। यह पुस्तक एक ऐसे व्यक्तित्व की है जो युवाओं को सीख देती है और ग्रामीण परिवेश से निकला कोई व्यक्ति बिना संसाधनों के भी सत्ता का सिरमौर बन सकता है।
नवोदित लेखकों को कोई संदेश देना चाहेंगे?
मैं खुद ही अभी संघर्ष कर रहा हूं। सही मायने में मैं भी नवोदित लेखक ही हूं। किन्तु इतना अवश्य कहना चाहूंगा कि लगातार किया गया प्रयास कभी विफल नहीं होता है। मुझे यह नहीं सोचना चाहिए कि मेरे विषय में समाज़ क्या कहेगा। लोग हंसी का पात्र भी बनायेंगे आपको किन्तु अपने संकल्पों के प्रति सदैव अडिग रहना चाहिए। संकल्प से सिद्धि तक की यात्रा ही हमारे जीवन का मूल उद्देश्य है। लोग भ्रमित करेंगे आपकी आलोचना भी करेंगे किन्तु हमें बस अपने मार्ग पर आगे बढ़ते जाना है। पर्वत के समान हमारा संकल्प हमें कभी अपने मार्ग से विमुख नहीं होने देगा।
‘लेखक मूलरूप से उत्तरप्रदेश के बहराइच जिले के रहने वाले हैं। सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहने के साथ समसामयिक एवं राजनितिक मुद्दों पर लेख लिखते रहे है। ‘लव यू पापा’ इनकी पहली कृति थी जिसको पाठकों ने खूब सराहा है।’