नयी दिल्ली: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली सहित दुनिया के 30 प्रमुख संस्थानों द्वारा प्रमाणित प्लाजमाक्लस्टर आयन प्रौद्योगिकी वाला एयर प्यूरीफायर वायुजनित नोवेल कोरोना वायरस (सार्स कोव 2) को संपर्क में आने पर 30 सेकेंड में 90 फीसदी तक निष्क्रिय कर देता है।
इस प्रौद्योगिकी द्वारा कोरोना वायरस को निष्क्रिय किये जाने को लेकर जापान के नागासाकी और शिमने विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों ने अध्ययन किया है। यह अध्ययन सितंबर महीने में किया गया है और इस प्रौद्योगिकी आधारित उपकरण वाली कंपनी शार्प ने यह दावा किया है।
इस प्रौद्योगिकी आधारित शार्प क्यूनेट जेनेशनल एयरप्यूरीफायर का विपणन करने वाली डायरेक्ट सेलिंग कंपनी क्यूनेट लिमिटेड के दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय निदेशक ऋषी चांडिओक ने कहा कि वर्तमान माहौल में यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि पूरी दुनिया की सरकारें कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रयासरत है। दुनिया में सबसे पहले इस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करने वाली कंपनी शार्प को बधाई देते हुये उन्होंने कहा कि यह प्रौद्योगिकी 90 फीसदी कोरोना वायरस को निष्क्रिय कर देती है।
उन्होंने कहा कि इस प्रौद्योगिकी की उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सम्मानित संस्थानों ने अपने शोध से प्रमाणित किया है। इस पर शोध करने वाले संस्थानों में नागासाकी विश्वविद्यालय के नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर द कंट्रोल एंड प्रेवेशन ऑफ इंफेटियस डीजिज/ इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन, जापान सोसायटी फॉर वायोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी विभाग और शिमने विश्वविद्यालय शामिल है।
उन्होंने कहा कि शार्प पूरी दुनिया में तीसरे पक्ष के शोध संस्थानों के साथ मिलकर प्लाजमाक्लस्टर प्रौद्योगिकी की प्रभावशीलता पर काम कर रही है। अब तक कई ऐसे स्वतंत्र शोध हो चुके हैं जिसमें इस प्रौद्योगिकी की प्रामाणिकता स्थापित हुई है।