#Mahashivratri पर 37 वर्षों बाद प्रदोष, शिव एवं सर्वार्थ सिद्धियोग का बन रहा संयोग, इस तरह करें महादेव की अराधना

आलेख चौपाल
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नयी दिल्ली: भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का #Mahashivratri महाशिवरात्रि पर्व सबसे बड़ा पर्व है। मान्यता है कि इस तिथि पर ही भगवान शंकर और माता पार्वती का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि पर कई दुर्लभ महासंयोग बन रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि भोलेनाथ अपने भक्तों पर अपनी कृपा की वर्षा करने वाले हैं। 37 वर्षों के बाद प्रदोष, शिवयोग एवं सर्वार्थ सिद्धि योग का महाशिवरात्रि पर सुखद संयोग बन रहा है।

आचार्यों के अनुसार, महाशिवरात्रि पर श्रवण एवं घनिष्ठा नक्षत्र मकर एवं कुंभ राशि होने से जहां शनि का संयोग बना है। वहीं, इस महाशिवरात्रि पर मध्यरात्रि में भगवान शिव के सिर पर विराजित चंद्रमा कुंभ राशि में आकर शनि और सूर्य के साथ मिलकर भोलेनाथ के माथे पर विराजित त्रिपुंड चंदन जैसा त्रिग्रही योग बनाएंगे। महाशिवरात्रि पर इस योग का बनना बेहद दुर्लभ संयोग है। वहीं, षडाष्टक योग होने से माता महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

234 साल बाद बना यह खास योग

महाशिवरात्रि पर पंच महायोग बन रहा है। शिवरात्रि पर केदार, शंख, शश, वरिष्ठ और सर्वार्थ सिद्धि योग मिलकर पंच महायोग बना रहे हैं। ऐसा अद्भुत संयोग करीब 234 साल बाद बन रहा है। इस दिन त्रयोदशी और चतुर्दशी दोनों तिथियां हैं। मान्यता है कि इस दिन किसी कार्य की शुरुआत करना व खरीददारी करना अति उत्तम होता है।

महादेव को ये करें अर्पण

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को बेलपत्र अति प्रिय है। इसलिए कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन जलाभिषेक करने के साथ बेलपत्र चढ़ाने से शिव जी अति प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं। इस दिन भक्तगण भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करने के साथ धतूरा, बेलपत्र सहित कई चीजें अर्पित करते हैं, लेकिन इन सभी चीजों में बेलपत्र भगवान शिव को अति प्रिय है।

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