‘चाँद’ का कृष्ण पक्ष- पढ़िए साहित्यकार संजय मिश्रा की कलम से

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अपने देश का चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण से पूरे देश में खुशी का माहौल है। चंद्रयान जिस तरह अपने निश्चित कार्यक्रम के अनुरूप चाँद की ओर अग्रसर है, आशा है कि चंद्रयान-3 इस बार सफलतापूर्वक चाँद पर उतर जाएगा।  इसकी सहायता से हमारे वैज्ञानिकों द्वारा चंद्रमा के उस अँधेरे पहलू को रोशन करने की कोशिश होगी, जिसे ‘डार्क साइड ऑफ मून’ कहा जाता है। यह कृष्ण पक्ष चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव का है। हमेशा छाया या अँधेरे में रहने वाले चाँद के दक्षिणी ध्रुव के इस हिस्से में बेहद ठंडे क्रेटर्स (गड्ढों) में जमी हुई बर्फ के भंडार हो सकते हैं, जो पानी के बड़े स्रोत होंगे। यहाँ जीवाश्मों का खजाना मिल सकता है। इसमें हीलियम-3 जैसा बहुमूल्य खनिज मिलने की भी आशा जताई जा रही है। एक टन हीलियम की मौजूदा कीमत करीब पाँच अरब डॉलर हो सकती है। इसरो ने दक्षिणी ध्रुव की चट्टानों में लोहा, मैग्नीशियम आदि तत्त्वों की मौजूदगी का अंदाजा लगाया है।

यह सही है कि मानव ने पृथ्वी पर सभ्यता के प्रारंभ से अब तक प्रगति के अपने मानदंडों के अनुरूप सभ्य संस्कृति की ओर कदम बढ़ाये हैं। भौतिक और वैज्ञानिक प्रगति का ही परिणाम है कि वैज्ञानिक पृथ्वी के साथ-साथ ब्रह्मांड के अनेक ग्रहों पर खोजी अभियान में लगे हैं। भारत ने बहुत सोच-समझकर अपने चंद्रयान को चाँद के दक्षिणी ध्रुव यानी उसके अँधेरे पक्ष का अध्ययन के लिए भेजा है। भारत ने जिस समय चंद्रयान को भेजा, उसी समय भारत के विकास के उजले पक्ष के अनेक समाचार प्राप्त हो रहे थे। जिसमें ताजा वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) के अनुसार, भारत में 2005 से 2021 के बीच केवल 15 वर्षों की अवधि में लगभग 41.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।

नीति आयोग के ‘राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक: एक प्रगति संबंधी समीक्षा 2023’ के अनुसार वर्ष 2015-16 से 2019-21 की अवधि के दौरान रिकॉर्ड 13.5 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से मुक्त हुए। स्वच्छता, पोषण, रसोई गैस, वित्तीय समावेशन, पेयजल और बिजली तक पहुँच में सुधार करके सरकार के समर्पित फोकस से इन क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण प्रगति हुई है।

इसके साथ ही भारत ने आर्थिक विकास में लंबा डग भरते हुए इस साल हमारी अर्थव्यवस्था ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया के पाँ्चवें स्थान पर पहुँच गयी है। कोरोना के दौरान भारत ने गुणवत्तापूर्ण वैक्सीन बनाकर और उदारतापूर्वक पूरी दुनिया को समय से मुहैया कराकर मानवता की बेमिशाल सेवा की। इसके अलावा हाल के वर्षों में शिक्षा, शोध, कृषि आदि अनेक क्षेत्रों में लगातार प्रगति कर पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल कायम की है। पूरी दुनिया में आज भारतीयों का सम्मान बढ़ा है।

विविध उजले पक्षों के बावजूद अनेक अँधेरे पक्ष भी देश के सामने मुँह बाये खड़े हैं, जो हमारे सारे उजले पक्षों को धुँधला कर रहे हैं। यह कैसा संयोग है कि जिस समय चंद्रयान का प्रक्षेपण किया जा रहा था, ठीक उसी दिन पूरे भारत में मणिपुर में दो महिलाओं को एक अंधी भीड़ द्वारा निर्वस्त्र कर घुमाने का वीडियो और कुछ दरिंदों द्वारा बालात्कार का समाचार पूरे देश को शर्मशार कर रहा था। इसी दौरान बंगाल के पंचायत चुनाव में अनेक लोगों की हत्याएँ और लोकतंत्र का अपहरण हो रहा था। यहाँ तक कि महिला प्रत्याशियों के साथ हिंसा और निर्वस्त्र घुमाने का मामला सामने आया है। इन्हीं दिनों राजस्थान के करौली में 19 वर्षीय एक दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ। बताया जा रहा है कि दरिंदों ने सामूहिक दुष्कर्म के बाद युवती की बेरहमी से हत्या कर उसके चेहरे पर तेजाब फेंककर  पीड़िता की लाश को कुएँ में डालकर फरार हो गये। बिहार में घृणित बालात्कार की घटनाएँ लगातार बढ़ रहीं है। बिहार के बेगूसराय में एक छात्रा को गाँव वालों ने इसलिए नंगा करके पीटा कि उसने संगीत शिक्षक से शारीरिक संबंध बनाए। देश की राजधानी दिल्ली तक में आए दिन महिलाओं और बच्चियों की नृशंस हत्या और अनेक तरह की हिंसा एवं प्रताड़ना का सिलसिला लगातार जारी है। उपरोक्त घटनाएँ तो कुछ दिनों का नमूना मात्र हैं।

इसके अलावा मानव तस्करी, ड्रग, नशे के कारोबार एवं लत में फँसकर बहुत बड़ी संख्या में लोगों की जिंदगी बर्बाद हो रही है। सांप्रदायिक, जातीय, क्षेत्रीय एवं भाषा से संबंधित अनेक तरह की हिंसा के अनेक मामले देश के अँधेरे पक्ष को घना कर रहे हैं। अंधविश्वासों में फँसकर हर साल हजारों लोग मौत के मुँह में समा जाते हैं। अपनी भौतिक सुख-सुविधाओं के लिए हमने प्रकृति पर आघात किए, दुष्परिणाम स्वरूप हम बाढ़, सुखाड़, गरमी, महामारी एवं भूकंप आदि के रूप में सहने के लिए अभिशप्त हैं।

त्रासद स्थिति तो यह है कि सदियों के संघर्ष से हासिल जनतंत्र के मंदिर संसद के वाद, प्रतिवाद और संवाद के माध्यम से देश की सारी समस्याओं का समाधान एवं विधियों का निर्माण होता है, जिससे शासन व्यवस्था का संचालन होता है। वहाँ लगातार कई सालों से समुचित संवाद ही नहीं हो पा रहा है। मुद्दों पर राजनीतिक-वैचारिक मतभेद निजी शत्रुता की हद तक पहुँच गए हैं, जोकि जनतंत्र के लिए शुभ नहीं है।

हमने चाँद के कृष्ण पक्ष को जानने के लिए चंद्रयान को तो भेज दिया, किन्तु अपने देश में ही अनेक ऐसे अँधेरे पक्ष हैं, जिन्हें जानते-बूझते भी मिटाने का पूरा प्रयास नहीं कर रहे हैं। जिसके कारण प्रगति के अनेक ध्रुवतारों के बावजूद मेरे देश की चमक धुँधली पड़ जाती है। अगर हम इन कृष्ण पक्षों का समुचित अध्ययन करके उचित समाधान निकाल पाएँ तो देश की आधी आबादी, हमारे युवा तथा समाज के अनेक वर्ग अपनी पूरी ऊर्जा से देश और समाज की प्रगति में अपना पूरा योगदान दे सकेंगे। हमारा लोकतंत्र और संसद का स्थान पूरी दुनिया में सर्वोपरि होगा। तभी हम चाँद के कृष्ण पक्ष में छुपे संसाधनों को हासिल कर उसका सदुपयोग कर पायेंगे।

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