सुधांशु गौड़
Corona से लड़ते हुए देश को लगभग 15 महीने हो चुके हैं। गत वर्ष इस महामारी के बारे में किसी को भी इसका क ख ग, कुछ नहीं ज्ञात था, लेकिन वैज्ञानिकों, डॉक्टरों के अथक प्रयासों से दिसम्बर तक देश ने इसके खिलाफ लड़ने के लिए वैक्सीन (Vaccine) खोज ली। 16 जनवरी 2021 से देश में वैक्सीन प्रोग्राम का प्रथम चरण शुरू हुआ। पहले चरण के अंतर्गत डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ समेत कोरोना वारियर्स को वैक्सीन लगायी गयी है। दूसरा चरण एक मार्च से शुरू किया गया। जिसके अंतर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु वालों को टीका लगाया गया। इस चरण में 45 वर्ष से अधिक उम्र के उन लोगों को भी टीका लगाया गया, जो किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। वहीं एक अप्रैल से तीसरे चरण के अंतर्गत 45 वर्ष से अधिक आयु वालों को भी टीका लगना शुरू हो गया। एक मई से 18 वर्ष से अधिक आयु वालों को भी टीका लगना शुरू हो गया।
अगर आंकड़ों की बात करें तो 29 मई 2021 तक देशभर में 43,049 टीकाकरण केन्द्रों पर टीका लगाया जा रहा था, जहां 20 करोड़ 77 लाख 68 हजार 279 वैक्सीन की डोज लगाई जा चुकी हैं, जिनमें से चार करोड़ 29 लाख 90 हजार 327 लोगों को दोनों चरणों में टीका लगाकर कोरोना के खिलाफ कवच दे दिया गया। वहीं 16 करोड़ 47 लाख 77 हजार 952 लोगों को अब तक टीके की पहली डोज लगाई जा चुकी है। अगर प्रतिशत में देखें तो देश की कुल जनसंख्या के हिसाब से अब तक लगभग चार प्रतिशत लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज दी जा चुकी हैं। हालांकि यह आंकड़ा संतोषजनक तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन अगर दुनिया के हिसाब से देखें तो भारत में सबसे तेज वैक्सीन लगाई जा रही है। दुनियाभर में अब तक लगभग 184 करोड़ वैक्सीन की डोजें लगाई गई हैं, जिनमें से अकेली लगभग 21 करोड़ डोजें सिर्फ भारत में लगाई गयी हैं।
वैक्सीन को लेकर आंकड़े तो ठीकठाक लग रहे हैं, लेकिन जमीन पर हालात इतने ठीक नहीं हैं। सरकार पुरजोर कोशिश में है कि लगभग एक साल के अंदर देश की पूरी जनता को वैक्सीन लगा दी जाए, लेकिन गांवों और छोटे कस्बों में वैक्सीन को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं। आपने पिछले दिनों एक खबर पढ़ी होगी कि बाराबंकी जिले के एक गांव के कुछ लोग नदी में इसलिए कूद गये कि उन्हें वैक्सीन न लगवानी पड़े। तमाम जगह अफवाह फैला दी गयी है कि शुरूआत में तो वैक्सीन ठीक थी। लेकिन इस वक्त वैक्सीन की होती किल्लत और उसके राजनैतिक विरोध से बचने के लिए सरकार वैक्सीन की सीसियों में पानी भरकर लगवा रही है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के एक गांव में कुछ लोग वैक्सीन का विरोध सिर्फ इसलिए कर रहे हैं कि वैक्सीन भाजपा सरकार लगवा रही है। वे लोग समाजवादी पार्टी के समर्थक हैं और उन्हें भरोसा है कि आगामी विधानसभा चुनावों के बाद प्रदेश में सपा की सरकार आएगी, तभी वे वैक्सीन लगवाएंगे। इसके पीछे वे तर्क भी देते हैं कि उनके नेता अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार का क्या भरोसा। सपा की सरकार आने पर वो सबको वैक्सीन लगवाएंगे। इसी वजह से वो लोग वैक्सीन नहीं लगवा रहे हैं।
देशभर की तमाम जगहों पर वैक्सीन को लेकर तमाम अफवाहें और भ्रांतियां फैली हुई हैं। सरकार इनको दूर करने की कोशिश तो कर रही है। जनवरी महीने में देशभर के 37 संसदीय क्षेत्रों में वैक्सीन को लेकर एक सर्वे किया गया, जिसमें कई चौकानें वाली बातें सामने आयीं। इस सर्वे में सामने आया कि इन जगहों के 21 प्रतिशत लोग वैक्सीन लगवाना ही नहीं चाहते। जिसके पीछे उनके अपने तर्क थे। कुछ लोगों का मानना था कि वैक्सीन में कुछ ऐसी दवा मिलाई गयी है, जिससे मर्दों में नपुसंकता आ जाएगी। जिससे वे कभी पिता नहीं बन पाएंगे। कुछ लोगों का तर्क था कि वैक्सीन के जरिए सरकार सभी के अंदर एक माइक्रो चिप लगवाना चाहती है। जिससे वो उनकी एक-एक गतिविधियों पर नजर रख सके। कुछ लोग वैक्सीन सिर्फ इसलिए नहीं लगवाना चाहते थे क्योंकि उनको लगता है कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ठीक है, और वैक्सीन केवल बीमार या संक्रमित लोगों को ही ;लगवाना चाहिए। ऐसे ही न जाने कितनी अफवाहें और भ्रांतियां लोगों के बीच में फैली हुई हैं। जिस वजह से वो कोरोना से बचाव के लिए सबसे कारगर कवच वैक्सीन लगवाने से बच रहे हैं। इन सब बातों से जाहिर होता है कि कोरोना का इतना विकारल रूप देख लेने के बाद भी लोगों में अभी भी वैक्सीन लगवाने को लेकर संकोच है। अभी हाल ही में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय समेत कुछ अन्य संस्थाओं ने एक सर्वे में पाया कि भारत में 56 प्रतिशत लोग वैक्सीन लगवाने को तैयार हैं लेकिन 44 प्रतिशत लोग संकोच में हैं। उनमे से कुछ लगभग सात प्रतिशत लोग तो ऐसे हैं, वैक्सीन न लगवाने का पक्का इरादा बना चुके हैं।
सरकार को टीकाकरण के साथ-साथ इसके खिलाफ भ्रांतियों व अफवाहों के खिलाफ भी अभियान चलाना पड़ेगा। हालांकि अभियान अभी भी चल रहा है, लेकिन बढ़ती अफवाहों को देखते हुए इसे और तेज करने की जरुरत है, वरना कहीं ऐसा न हो कि इन अफवाहों की वजह से धीमा चल रहा वैक्सीन अभियान और भी धीमा पड़ जाए और कोरोना के खिलाफ इस अंतिम चरण के युद्ध में देश को हार का समाना करना पड़े।