मामलों को सूचीबद्ध कराने में वकीलों के साथ भेदभाव का आरोप झेल रहे सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी द्वारा एक मामले की मेंशनिंग (Mentioning) की अनुमति देने से मंगलवार को इनकार कर दिया। साथ ही कहा कि कोर्ट के खिलाफ इसे लेकर पक्षपाती होने का आरोप लगाये जाते रहे हैं, इसलिए वह ऐसी कोई अनुमति नहीं देंगे।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शरद अरविंद बोबडे ने श्री रोहतगी का अनुरोध यह कहते हुए ठुकरा दिया कि उन्हें बहुत सारी शिकायतें मिली हैं कि कुछ गिने-चुने वकीलों को मामले की मेंशनिंग की अनुमति दी जा रही है।
यह वाकया उस वक्त हुआ है जब श्री रोहतगी एक मामले में पैरवी कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने एक असम्बद्ध मामले के विशेष उल्लेख की अनुमति मांगी, इस पर न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा, “आप दूसरे मामले में पेश हो रहे हैं और मेंशनिंग अन्य मामले के लिए कर रहे हैं। ऐसा नहीं होगा, हमें गिने-चुने वकीलों को मेंशनिंग की अनुमति मिलने की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।”
इस पर श्री रोहतगी ने कहा कि वह जिसका उल्लेख कर रहे हैं उसकी अनुमति उन्हें दो सप्ताह पहले दी गयी थी। इस पर न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा, “हो सकता है, लेकिन आप पहले मेल भेजिए, फिर हम निर्णय लेंगे।”
वरिष्ठ अधिवक्ता ने इसके बाद जोर देकर कहा कि संबंधित मामला बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मामले की गम्भीरता का इजहार आप मेल के जरिये करें, वह उसे पढ़कर निर्णय लेंगे।
इसके बाद श्री रोहतगी ने कहा कि वह आज ही मेल कर देंगे।