नयी दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन न्यूज चैनल के विवादित कार्यक्रम ‘बिंदास बोल’ की शेष कड़ियों के प्रसारण पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय खंडपीठ ने मंगलवार को हुई मैराथन सुनवाई के बाद शाम को अपने नौ पन्ने के अंतरिम आदेश में कार्यक्रम की शेष कड़ियों के प्रसारण पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी और मामले की सुनवाई के लिए 17 सितम्बर की तारीख मुकर्रर की। खंडपीठ में न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ भी शामिल हैं।
याचिकाकर्ता फिरोज खान ने सुदर्शन टीवी के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाण के शो की मंशा पर सवाल खड़े किये थे और कहा था कि इस कार्यक्रम के जरिये संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) में मुसलमानों के प्रवेश को साम्प्रदायिक रूप दिया जा रहा है।
इससे पहले सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए खंडपीठ ने कहा कि ‘बिंदास बोल’ कार्यक्रम के जरिये किसी एक समुदाय को निशाना नहीं बनाया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि वह संवैधानिक अधिकारों का संरक्षक है और किसी समुदाय को अपमानित करने के प्रयास का किसी भी प्रकार से समर्थन नहीं कर सकता।
सुनवाई के दौरान सुदर्शन टीवी एवं चैनल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि कार्यक्रम पर रोक का आदेश अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन है। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि खंडपीठ को इस मामले को केवल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक ही सीमित न रखते हुए इसके व्यापक पहलुओं पर विचार करना चाहिए।
उनकी दलील के बीच में ही न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने श्री मेहता से सवाल किया कि क्या सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 11 सितम्बर से 14 सितम्बर तक प्रसारित इस शो के चार एपिसोड के बारे में विचार किया है, इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी हासिल करनी होगी।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने श्री दीवान से कहा कि वह उनके मुवक्किल (चव्हाण) से कुछ संयम की उम्मीद करते हैं। उनका मुवक्किल जो कर रहा है, उससे देश का नुकसान हो रहा है।
इससे पहले याचिकाकर्ता फिरोज खान की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप चौधरी ने इस शो को साम्प्रदायिक करार दिया।
गौरतलब है कि खंडपीठ ने अपने 28 अगस्त के अंतरिम आदेश को वापस लेते हुए आज नया अंतरिम आदेश जारी किया। न्यायालय ने पिछले आदेश में शो पर रोक का ओदश देने से इनकार कर दिया था, लेकिन केंद्र सरकार, भारतीय प्रेस परिषद, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन और सुदर्शन न्यूज को नोटिस जारी किये थे।