नयी दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र के 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले खदान से खनन पर रोक लगाने के बुधवार को संकेत दिये और कहा कि वह देश के विकास को रोकना नहीं चाहता, लेकिन वह यह भी नहीं चाहता कि किसी भी प्रकार से प्राकृतिक सम्पदा का नुकसान हो।
मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने झारखंड में कोयला ब्लॉकों की वर्चुअल नीलामी के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि वह देशभर के लिए आदेश जारी करने पर विचार करेगा कि अगर कोई खदान पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र के 50 किलोमीटर के दायरे में आती है तो खनन की इजाजत नहीं होगी।
न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा, “हम देश का विकास रोकना नहीं चाहते, लेकिन हम यह भी नहीं चाहते कि किसी भी तरह प्राकृतिक सम्पदा का क्षय हो।” मुख्य न्यायाधीश की यह प्रतिक्रिया उस वक्त आयी, जब एटर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने कहा कि उसके किसी भी आदेश का पूरे देश में असर होगा। सरकार देश की अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण कर रही है।
शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई छह नवम्बर तक स्थगित कर दी।