महबूबा मुफ्ती की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जम्मू कश्मीर प्रशासन से पूछा, कब तक रखेंगे मुफ्ती को नजरबंद

समाचार न्यायालय
Spread the love

नयी दिल्ली :  सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत में लेने के खिलाफ दायर उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती की नयी याचिका पर जम्मू कश्मीर प्रशासन से मंगलवार को जवाब तलब किया.

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से पूछा कि महबूबा मुफ्ती को कब तक हिरासत में रखा जा सकता है? पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे और दो केंद्र शासित प्रदेशों में इसके विभाजन की पूर्व संध्या पर गिरफ्तार किए जाने के बाद पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती एक साल से अधिक समय से हिरासत में हैं.

शीर्ष अदालत ने आज जम्मू-कश्मीर प्रशासन को अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय दिया कि मुफ्ती को कितने समय तक हिरासत में रखा जा सकता है और क्या उनकी हिरासत को एक वर्ष से अधिक बढ़ाया जा सकता है? न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने उसकी नजरबंदी का प्रस्ताव क्यों रखा है?

जुलाई में, जन सुरक्षा अधिनियम के तहत मुफ्ती की नजरबंदी के तीन और महीनों के लिए बढ़ा दिया गया था. जम्मू कश्मीर प्रशासन का प्रतिनिधित्व करने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जजों से कहा कि वह किसी भी तरह की कोई टिप्पणी न करें। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हिंसा का इतिहास रहा है. तुषार मेहता ने कुछ समय मांगा और कहा, हम सप्ताह के अंदर इन मुद्दों पर अदालत को जवाब देंगे.

इल्तिजा मुफ़्ती ने अपनी माँ की रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. अपनी याचिका में इल्तिजा मुफ्ती का कहना है कि उनकी मां की नजरबंदी गैरकानूनी है.  उन्होंने यह भी कहा कि महबूबा मुफ्ती के परिवार के सदस्यों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई है. इल्तिजा ने सर्वोच्च अदालत से आग्रह किया था कि उनकी मां को राजनीतिक गतिविधियां शुरू करने की इजाजत दी जाये.

इस पर कोर्ट ने कहा कि पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती को पार्टी की बैठकों में भाग लेने के लिए अधिकारियों से अनुरोध करना चाहिए. शीर्ष अदालत ने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान कहा, जब भी इल्तिजा मुफ्ती अपनी मां से मिलने का अनुरोध करती है, तो संबंधित अधिकारियों को इस पर निर्णय लेना चाहिए.

पूर्व मुख्य मंत्री फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला भी पिछले साल अगस्त से घर में नजरबंद थे, लेकिन वे पहले ही रिहा हो चुके हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *