Nida Fazali स्मृति शेष : शायरी को कोठे की रुमानियत से निकालकर आंगन में रोप दिया

Nidi Fazali निदा फाजली साहब गजल और शायरी को कोठे की रूमानियत से निकाल कर खेत, खलिहान में गेहूं, धान, और आंगन में तुलसी के बिरवा की तरह रोप गये।

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