लोकजनशक्ति पार्टी (LJP) के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का गुरुवार को निधन हो गया. उन्होंने दिल्ली के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली. बिहार के दिग्गज राजनेता का अंतिम संस्कार पटना में शनिवार को किया जाएगा. वहीं, रामविलास पासवान के निधन पर दिल्ली और अन्य राज्यों की राजधानियों में शुक्रवार को झंडा आधा झुका रहेगा. साथ ही पटना में अंतिम संस्कार के दिन भी झंडा आधा झुका रहेगा और उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा.
दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के पार्थिव शरीर को शुक्रवार दोपहर बाद 2 बजे पटना लाया जाएगा. इसके बाद पार्थिव शरीर को एयरपोर्ट से लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश कार्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा. दिवंगत नेता के पार्थिव शरीर को पटना लोजपा कार्यालय से विधानसभा ले जाया जाएगा. इससे पहले स्वर्गीय पासवान के पार्थिव शरीर को आखिरी दर्शन के लिए सुबह 10 बजे उनके आवास 12 जनपथ पर अस्पताल से सीधा लाया जाएगा. शनिवार यानी 10 अक्टूबर को उनका अंतिम संस्कार पटना में ही किया जाएगा.
लोजपा के संस्थापक और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पासवान कई सप्ताह से दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती थे. 3 अक्टूबर को देर रात उनके हृदय की सर्जरी हुई थी. फॉर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट द्वारा जारी बयान के अनुसार, पिछले 24 घंटों में पासवान के स्वास्थ्य में गिरावट आई और बृहस्पतिवार को शाम छह बजकर पांच मिनट (06:05 शाम) पर उन्होंने अंतिम सांस ली.
रामविलास पासवान के निधन की जानकारी उनके बेटे चिराग पासवान ने ट्वीट कर दी. चिराग पासवान ने अपने ट्वीट में लिखा, “पापा….अब आप इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन मुझे पता है आप जहां भी हैं हमेशा मेरे साथ हैं. Miss you Papa…”. बता दें कि रामविलास पासवान का जन्म 5 जुलाई 1946 को बिहार के खगड़िया में हुआ था. वहीं उनकी मृत्यु 08 अक्टूबर 2020 को दिल्ली के एक अस्पताल में हुई.
रामविलास पासवान आठ बार लोकसभा के सदस्य चुने गए और कई बार हाजीपुर संसदीय सीट से सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम किया. वह वीपी सिंह, एचडी देवे गौड़ा, इन्द्र कुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और वर्तमान में नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में मंत्री रहे हैं.
पासवान के निधन पर शोक जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “मैं शब्दों से परे दुखी हूं. हमारे राष्ट्र में अब एक ऐसा शून्य है जो शायद कभी नहीं भरेगा. रामविलास पासवान जी का निधन एक व्यक्तिगत क्षति है. मैंने एक दोस्त, मूल्यवान सहयोगी और ऐसे व्यक्ति को खो दिया है, जो हर गरीब की गरिमापूर्ण जिंदगी की सुनिश्चित करने के लिए बेहद उत्सुक था.”