CCEA ने ओडिशा और झारखंड में रेलवे नेटवर्क के विस्तार के लिए 3,907 करोड़ रुपये की लागत वाली दो मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेल क्षमता बढ़ाना, माल ढुलाई को अधिक सुगम बनाना और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करना है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे मंत्रालय की इन दोनों परियोजनाओं को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं पर लगभग 3,907 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह जानकारी केंद्र सरकार की आधिकारिक कैबिनेट ब्रीफिंग में भी दी गई है।
मंजूर परियोजनाओं में पारादीप–हरिदासपुर रेल लाइन के दोहरीकरण और राजखरसावां–डांगोआपोसी के बीच चौथी रेल लाइन के निर्माण को शामिल किया गया है। इनसे ओडिशा और झारखंड के चार जिलों में भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 145 किलोमीटर अतिरिक्त रेल लाइन जुड़ जाएगी।
सरकार के अनुसार, अतिरिक्त रेल लाइन बनने से प्रमुख माल ढुलाई मार्गों पर भीड़ कम होगी, परिचालन क्षमता और सेवा की विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा माल परिवहन अधिक तेज और कुशल होगा। परियोजनाओं से क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
इन परियोजनाओं को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य एकीकृत बुनियादी ढांचा, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करना है। इससे यात्रियों, माल और सेवाओं के निर्बाध आवागमन में सुविधा मिलेगी।
सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से करीब 1,526 गांवों और लगभग 14 लाख आबादी को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। साथ ही ललितगिरि बौद्ध परिसर, श्री बलदेवजीउ मंदिर और मेघाहातुबुरु पहाड़ियों जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी।
रेल कॉरिडोर कोयला, लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर और जिप्सम जैसी थोक वस्तुओं के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में लगभग 44 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) की अतिरिक्त वृद्धि होगी, जिससे औद्योगिक विकास और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बल मिलेगा।
सरकार ने कहा कि बढ़ी हुई रेल क्षमता से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, लगभग छह करोड़ लीटर तेल आयात की बचत होगी और करीब 29 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा। यह पर्यावरणीय लाभ एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर माना गया है।
केंद्र सरकार के अनुसार, ये परियोजनाएं रेलवे के आधुनिकीकरण, माल एवं यात्री परिवहन को अधिक कुशल बनाने और पीएम गति शक्ति पहल के तहत एक टिकाऊ एवं एकीकृत परिवहन प्रणाली विकसित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।