बिहार सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री Bihar Homestay Scheme को मंजूरी दे दी है। राज्य मंत्रिमंडल से स्वीकृत इस योजना के तहत देशी-विदेशी पर्यटक होटल के बजाय स्थानीय परिवारों के घरों में ठहर सकेंगे, जिससे उन्हें बिहार की संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और आतिथ्य का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा।
पर्यटन विभाग के अनुसार, योजना के पहले चरण में 16 जिलों के 34 प्रमुख पर्यटन स्थलों को शामिल किया गया है। इनमें गया का महाबोधि मंदिर और विष्णुपद मंदिर, नालंदा महाविहार, राजगीर रोपवे, जू सफारी, नेचर सफारी, वैशाली शांति स्तूप, कैमूर का मुंडेश्वरी मंदिर, केसरिया स्तूप, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, बाराबर गुफाएं, ककोलत जलप्रपात, मंदार पर्वत, गरीबनाथ धाम, भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य, पुनौरा धाम, लछुआर जैन मंदिर और देव सूर्य मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थल शामिल हैं।
योजना के तहत केवल वही होमस्टे पात्र होंगे, जो अधिसूचित पर्यटन स्थल से पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित होंगे। एक होमस्टे इकाई में अधिकतम आठ कमरों को स्वीकृति दी जाएगी।
सरकार प्रत्येक कमरे के लिए 2.5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देगी। प्रति होमस्टे अधिकतम 10 लाख रुपये तक का अनुदान मिलेगा। वहीं, महिला उद्यमियों और 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को प्रति कमरे 25 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा एक लाख रुपये होगी। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को भी एक लाख रुपये तक का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।
पर्यटन विभाग ने अगले पांच वर्षों में 1,000 होमस्टे कमरों का पंजीकरण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया जल्द शुरू किए जाने की संभावना है।
सरकार का मानना है कि यह योजना पर्यटकों को स्थानीय जीवनशैली, परंपराओं और संस्कृति से सीधे जोड़ने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी। इससे कारीगरों, किसानों, महिलाओं और युवा उद्यमियों के लिए आय के नए अवसर पैदा होंगे तथा बिहार की पर्यटन क्षमता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।