राकेश मिश्रा
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु (Suvendu) अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) से संबंधित मसौदा विधेयक की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। यह जानकारी एक अधिसूचना जारी करके दी गई है।
अधिसूचना के अनुसार, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई समिति की अध्यक्षता करेंगी, जबकि अन्य सदस्यों में मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, स्थानिक आयुक्त दुष्यंत नारियाला, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, गृह और पर्वतीय मामलों के विभाग की प्रधान सचिव संघमित्रा घोष, शिक्षाविद् डॉ. रत्ना भट्टाचार्य, गौर बंग विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति गोपालचंद्र मिश्रा, वकील उस्मान गनी मल्लिक और निर्मल भट्टाचार्य शामिल होंगे।
अधिसूचना में कहा गया है कि मसौदा विधेयक के कानून में तब्दील होने के बाद उसके होने वाले व्यापक असर और परिणाम के मद्देनजर यह कमेटी गठित करने का फैसला किया गया।
अधिसूचना के अनुसार, विधानसभा में इसे प्रस्तुत करने और पारित करने से पहले कमेटी मसौदा विधेयक की पड़ताल करेगी।
गौरतलब है कि प्रस्तावित कानून का मकसद शादी, तलाक, बिना वसीयत के उत्तराधिकार और वसीयत के जरिये उत्तराधिकार से जुड़े मुद्दों को हल करना है।
राज्य सरकार ने कहा है कि उसने धर्म, आस्था या समुदाय से परे, राज्य के निवासियों के व्यक्तिगत दीवानी मामलों को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा बनाने के मकसद से विधेयक का मसौदा तैयार किया है।
प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “इस विषय के व्यापक असर और इसकी विशाल प्रकृति को देखते हुए, मसौदा विधेयक की विस्तृत जांच और समीक्षा के लिए इसे गठित किया गया है।”
वर्ष 2014 से तीन राज्यों – उत्तराखंड, गुजरात और असम – ने UCC अपनाया है, और पश्चिम बंगाल ऐसा करने वाला चौथा राज्य बनेगा।