वक्फ संशोधन कानून को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध की लहर जारी है, लेकिन पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले के जंगीपुर क्षेत्र में यह विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुका है। रविवार को कानून के खिलाफ निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ, जिसमें उपद्रवियों ने न सिर्फ पथराव किया बल्कि पुलिस की गाड़ियों में आग भी लगा दी।
जंगीपुर के PWD मैदान से शुरू हुआ विरोध मार्च जब उमरपुर की ओर बढ़ा, तभी पुलिस ने इसे रोकने की कोशिश की। प्रतिरोध के इस प्रयास के बाद माहौल गर्म हो गया और प्रदर्शनकारी उग्र हो गए। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि प्रदर्शनकारियों की संख्या अधिक थी जबकि मौके पर मौजूद पुलिस बल सीमित था, जिससे हालात बेकाबू हो गए। इस बीच कई इलाकों—जैसे बनियापुर और उमरपुरा—में घरों और दुकानों में भी तोड़फोड़ की खबरें हैं।
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को कुछ समय के लिए इलाके से पीछे हटना पड़ा, लेकिन बाद में अतिरिक्त बल बुलाकर हालात पर काबू पाया गया। मुर्शिदाबाद के संवेदनशील इतिहास को देखते हुए जिला प्रशासन ने अलर्ट मोड में काम करना शुरू कर दिया है और संवेदनशील इलाकों में पुलिस की भारी तैनाती की गई है।
घटना के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ममता सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि ममता बनर्जी या तो कानून-व्यवस्था संभालें या फिर इस्तीफा दें। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार पर इंटरनेट सेवाएं बंद करने का भी आरोप लगाया है, जिससे लोगों की जानकारी तक पहुँच बाधित हो रही है।
गौरतलब है कि मुर्शिदाबाद जिला पहले भी CAA और NRC के विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार, इस जिले में मुस्लिम आबादी करीब 66% है और जंगीपुर क्षेत्र में यह आंकड़ा लगभग 62% तक है। ऐसे में प्रशासन के लिए यह क्षेत्र सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील माना जाता रहा है।