सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे एवं अन्य कैबिनेट मंत्रियों के खिलाफ ‘आपत्तिजनक’ ट्वीट मामले में दर्ज प्राथमिकियों को एक जगह स्थानांतरित करने को लेकर समित ठक्कर की जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई से इनकार कर दिया। इस दौरान न्यायालय ने बेबाक टिप्पणी की कि अनुच्छेद 32 के तहत जनहित याचिकाओं की सुनवाई कर-करके वह इम्यून हो चुका है। उसे कोई भी चीज अब प्रभावित नहीं करती।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) शरद अरविंद बोबडे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने ठक्कर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी को बॉम्बे उच्च न्यायालय जाने की सलाह दी। श्री जेठमलानी ने खंडपीठ के समक्ष दलील दी कि प्राथमिकियों में दर्ज सारे आरोप जमानत योग्य हैं, लेकिन उनके मुवक्किल अब भी जेल में बंद हैं।
उन्होंने कहा कि यदि खंडपीठ इन तथ्यों के बावजूद आपका दिल नहीं दहला तो फिर उसे क्या दहला पाएगा? इस पर जस्टिस बोबडे ने कहा, “ऐसे मामले हम रोज देखते हैं और अब हम इससे प्रभाव शून्य (इम्यून) हो चुके हैं।” मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह अनुच्छेद 32 के तहत इस जनहित याचिका की सुनवाई नहीं कर सकते।
जस्टिस बोबडे ने कहा कि याचिकाकर्ता अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बॉम्बे उच्च न्यायालय के समक्ष जायें। इसके बाद श्री जेठमलानी ने याचिका वापस ले ली।
ठक्कर ने श्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे के खिलाफ कई ट्वीट किये थे। इसमें आदित्य को ‘बेबी पेंगुइन’ कहे जाने से संबंधित ट्वीट भी शामिल हैं।